“वेदना” 

nilesh jha

अमावस की वो सर्द रात , पूनम आज घर से निकली तो थी , कुछ गुमनाम लोगों की मदद करने , पर हमेशा की तरह घर का माहौल बिगड़ा हुआ था , पूनम की मदद उसे सुकून और ज़रूरतमन्द को कुछ रोटियां तो देती थी , पर निर्धन परिस्थिति में अपना और परिवार का पेट पालती, पूनम की मां ,बुढ़ापे में भी सब्जी का बड़ा सा टोकरा लिए ,गली गली घूमा करती थी , इतने कम कमाई में गुजारा ,उन्हें उतना नहीं खलता था जितना ,पूनम के पिता का काम ना करना ,ऊपर से शराब के नशे में धुत्त होकर मारपीट करना अखरता था, ज्यों ही उस रात पूनम पास की झुग्गियों से चंद रोटियाँ बांट कर आई , पूनम का शराबी पिता उसे गंदी गंदी गालियां देने लगा, शादी की उम्र में लड़का ना मिलना भी एक अभिशाप मानकर ,पूनम के पिता को ना सिर्फ चुभता ऊपर से शराब के साथ ये कुंठा भरी सोच, उस दिन बहुत भारी पड़ गयी , जब उस सर्द रात में आते ही पूनम बर्तन साफ करने लगी और उसके पिता शराब और कुंठा में उसे दिल भेदने जैसी गालियां और चरित्र को चोट पहुचने वाले कुशब्द उगलने लगा,कभी किसी मर्द से बात तक ना करने वाली पूनम, बहुत हद तक सहने के बाद बदचलन जैसे शब्द के प्रतिकार में रोटी सेंकने के चिमटे से पिता को दे मारा, भूलवश वो चिमटा पिता के चेहरे पर जा लगा ,आंखों की पलकों से ख़ून ज्यों ही बहा ,पूनम का शरीर ठंडा पड़ गया , जिस पिता ने बचपन में उंगलियां पकड़कर घुमाया था , प्यार किया था,आज उसी पिता को मारने मजबूर हो गयी , मन मे पश्चाताप का घड़ा भर सा गया , वो अंधेरी रात काली घनघोर लगने लगी ,पूनम और मां ने पिता की उस चोट पर मलहम तो लगाया पर जो घाव पूनम के मन मे पश्चाताप के रूप में लगा था ,वो शायद किसी मरहम से ना भरता,

उस काल के ग्रास रुपी रात में एक भी निवाला पूनम के गले नहीं उतरा,
रात भर पिता को लगने वाली चोट और पिता के हाथ को पकड़कर चलने की यादें ,बिस्तर के आसपास मंडराने लगीं ।।

ज्यों ही सुबह हुई ,घर मे मां की चीख पुकार निकल पड़ी,
पूनम को पश्चाताप के ग्रहण ने निगल लिया था,

एक वेदना की शिकार पूनम ने खुद को घर की छत से
अपनी चुन्नी के सहारे लटका कर ,स्वयं का जीवन समाप्त कर लिया था , बस दीवार पर कुछ शब्द लिख रखे थे ,

#नीलेश झा ‘नील’
 
परिचय:
नाम: नीलेश झा ‘नील’
पिता का नाम :श्री बृजेश झा
माता की नाम:श्रीमती शोभना झा
जन्मतिथि : 27 सितंबर 1986
शिक्षा : LLB , MBA, MSC.cs
शिक्षणस्थान:रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर , माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल मप्र
संप्रति: अधिवक्ता मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर , जिला एवं सत्र न्यायालय मंडला 
प्रकाशन:देश की प्रतिष्ठित विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में नियमित रचनायें एवं समीक्षाएं प्रकाशित!
विधा :- मुक्तक , बाल साहित्य, कविताये, लघुकथा , कहानियां , व्यंग्य , समीक्षाएं, समसामयिक विषयों पर लेख ।।
संपर्क सूत्र: देवदरा मंडला (मध्यप्रदेश)

matruadmin

Next Post

"मौत का नंगा नाच"

Sat Oct 20 , 2018
    दशहरे के अवसर पर देखो, बिखरी पड़ी हैं लाशें। अमृतसर में कहर है टूटा, टूट गयी सैकड़ो सांसे।। कैसे नंगे नाच खेले मौत ने, इतने लोग हैं मार गिराए। रावण, मेघनाथ, कुम्भकर्ण को, जलाने थे जो आये।। दो ट्रेनें गुजरी वहां से, एकदम पटरी लहूलुहान हुई। गिनती भी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।