अब_कैसे_होगा_दशहरा

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garima sinh
खड़े मिल गए चौराहे पर
आज मुझे श्री राम
बोले अब मैं लौट चला
वापस फिर सुरधाम।।
यहाँ जरूरत नहीं किसी को
अब पुरुषोत्तम श्री राम की
सर्वोच्च न्यायालय करे फैसला
पहले मेरे जन्म स्थान की।।
नाम पर मेरे रोज यहाँ न
जाने कितने  परिवर्तन होते
रोज नए वादे होते और
बड़े – बड़े अनसन होते।।
कोई मंदिर बनवाता है
और कोई उसे गिरता है
कोई करे सन्देह जन्म पर
साक्ष्य कोई मंगवाता है।।
कोई कहता है रुको तनिक
अभी आदेश तो आ जाने दो
कोर्ट से अपने रामलला का
जन्मप्रमाण पत्र बन जाने दो।।
साबित करने दो दुनियाँ में
उनकी कौशल्या ही माई हैं
पिता श्री दशरथ और लक्ष्मण
संग भरत शत्रुध्न भाई हैं।।
अयोध्या है जन्म भूमि और
चौदह वर्ष वनवास किया
साबित करने दो पहले की
 इन्होंने ही लंका को साफ किया।।
तब जाकर कहीं मुक्ति मिलेगी
और तम्बू ये हट पायेगा
रामलला का मंदिर फिर से
शायद ही बन पाएगा ।।
कारसेवकों के मौतों का
 कैसे कोई खण्डन होगा
कैसे बनेगा मंदिर प्रभु का
और पूजा रघुनन्दन का होगा।।
यही बात अब रामलला भी
सोच रहे हैं न्यायालय में खड़े – खड़े
कहीं बाबरी बन न जाये
हम तम्बू में ही पड़े रहे।।
जब कीमत अब रही नही
वेदों और पुराणों की
न्यायालय अब न्याय करेगा
 रामलला के आने की ।।
ये आडम्बर सहन नहीं है
मुझपर राजनीति अब बन्द करो
सहन नही होता अपमान
अब कोई उचित प्रबंध करो।।
रोज,रोज श्री राम के नारे
बड़े खोखले लगते हैं।।
राजनीतिक आश्वासन सारे
मुझे दोगले लगते हैं।।
इससे बेहतर होगा कि मैं
 सुरधाम निकल जाऊं
अब किस-किस को मैं अपने
 होने का प्रमाण पत्र दिखलाऊँ।।
मैं ही हूँ श्री राम ये कैसे
मैं सबको  समझाऊँगा
काटे मैंने दस शीश रावण के
साक्ष्य कहां से लाऊंगा।।
चारो तरफ अपराध का फैला
 घनघोर अंधियारा है
अब कोर्ट ही करे सुनिश्चित
मैंने ही रावण को मारा है।।
सारे तथ्य जब साफ करोगे
तभी न्याय हो पायेगा
वरना सिर्फ वादों और भाषण से
मन्दिर ना बन पाएगा।।
न्यायालय में केश चलाकर
 समय नही बर्बाद करो
हुआ बहुत अब देर निर्माण में
जल्दी से इंसाफ करो ।।
अगर नही बन पाया मंदिर
अब हिंदू आतंक मचा देंगे
राम नाम का मतलब सारी
दुनियाँ को समझा देंगे।।
अगर मनाना है दशहरा तो
आवाज उठाना होगा
रामलाल का मंदिर अब
 जल्दी ही बनवाना होगा।।
वरना अगर अब देर हुई तो
कुछ फिर ना कर पाओगे
अबकी बार गर सत्ता बदली
जीवन भरपछताओगे ।।
#गरिमा सिंह
परिचय- 
नाम-  गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।