चिन्तामय

SUNITA RAVAT
आज चिन्तामय हृदय है, प्राण मेरे थक गये हैं,
बाट तेरी जोहते ये नैन भी तो थक गये हैं,
निबल आकुल हृदय में नैराश्य एक समा गया है,
वेदना का क्षितिज मेरा आँसुओं से छा गया है…!!
आज स्मृतियों की नदी से शब्द तेरे पी रही हूँ,
प्यास मिटने की असम्भव आस पर ही जी रही हूँ,
पा न सकने पर तुझे संसार सूना हो गया है,
विरह के आघात से प्रिय! प्यार दूना हो गया है…!!
जब नहीं अनुभूति मिलती लोग दर्शन चाहते हैं,
उदधि बदले बूँद पा कर विधि-विधान सराहते हैं,
किन्तु दर्शन की कमी न बन गयी अनुभूति मुझ को,
यह तृषित चिर-वंचना की मिली दिव्य-विभूति मुझ को…!!
दीखती है, प्राप्ति का कंगाल बन कर मैं रहूँगी,
स्मित-विहत मुख से सदा गाथा भविष्यत् की कहूँगी,
जगत् सोचेगा कि इस  ने विरह जाना नहीं है,
विष-लता का विकच काला फूल पहचाना नहीं है…!!
जब कि उस के तिक्त फल को आज लौ मैं खा रही हूँ,
जब कि तिल-मिल भस्म अपने को किये मैं जा रही हूँ,
किन्तु मुझ को समय उस का दु:ख करने का नहीं है,
भक्त तेरे को यहाँ अवकाश मरने का नहीं है,
भक्त का कोई समय रह जाय भी आराधना से…!!
व्यस्त वह उसमें रहे आराधना की साधना से,
यदि सफल है दिवस वह जिस में भरा है प्यार तेरा,
रैन भी सूनी न होगी अंक ले अभिसार तेरा,
किन्तु कोरे तर्क से कब भक्त का उर भर सका है…!!
मेघ का घनघोर गर्जन कब तृषा को हर सका है,
बिखर जाते गान हैं सब व्यर्थ स्वर-सन्धान मेरे,
छटपटाते बीतते हैं दीर्घ साँझ-विहीन मेरे,
आज छू दे मन्त्र से, ओ दूर के मेहमान मेरे,
आज चिन्तामय हृदय है थक गये हैं प्राण मे…!!
#सुनिता रावत
अजमेर
 
परिचय-
सुनिता रावत
अजमेर (राजस्थान)
व्याख्याता-समाजशास्त्र
उपाधि-स्नात्तकोक्तर -समाजशास्र,इतिहास,राजनीति-विज्ञान

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।