सुनो प्रह्लाद….

0 0
Read Time3 Minute, 55 Second

sushil

सुनो प्रहलाद,कैसे लगाऊं तुम्हें रंग अबीर,
घिरे हो तुम असंख्य होलिकाओं से..
क्या जला सकोगे इन्हें अपनी बुआ की तरह,
राजनीति में षड्यंत्र को होली को।
शिक्षा को सरे बाजार बेचती होली को,
गाँवों को उजाड़ शमशान बनाती होली को।
शहरों को कांक्रीट जंगल बनाती होली को,
पेड़ों पर आरी चलाती होली को।
नदियों को रेगिस्तान बनाती होली को,
किसान को मौत से मिलाती होली को।
बेटियों को क़त्ल कराती होली को,
टीवी चैनलों पर चीखती-चिल्लाती होली को।
अपनी विचारधाराओं को दूसरे पर थोपती होली को,
रोटियों के लिए बचपन को तड़पाती होली को।
अमीरों को सरताज,गरीबों को रौंदती  होली को,
प्रतिभाओं को पीछे धकेलती होली को।
मिसाइलों,परमाणु बमों से खेलती होली को,
खुशियों को बाज़ारों में बेचती होली को।
देश द्रोह के नारे लगवाती होली को।

सुनो प्रह्लाद,इन होलिकाओं से कैसे मुक्ति पाओगे,
कैसे मारोगे देश के अंदर सुलगते दरिंदों को।
कैसे बचाओगे पंखों पर लटकते छात्रों को ?
कैसे सहलाओगे भूख से बिलबिलाई आँखों को ?
कैसे रोकोगे सीमा पार के आतंकों को ?
कैसे रोक पाओगे पर्वतों पर पिघलती बर्फ को ?
कैसे सह पाओगे सर्द सहमी रातों को?
क्या रोक पाओगे स्याह अँधेरे में लुटती अस्मतों को?
क्या रोक पाओगे तुम रेत के लुटते किनारों को?
क्या रोक पाओगे सलीबों पर लटकते किसानों को ?
क्या रोक सकोगे संसद में राजनीति के हंगामे को ?

मुझे मालूम है तुम इन होलिकाओं से घिरे हो अभिमन्यु की तरह ।
फिर कोशिश करेंगी यह होलिकाएँ तुम्हें जलाने की,
अनंत वर्षों से तुम इनसे बचते आ रहे हो।
क्या इस वर्ष भी  बच पाओगे ?
अगर इनसे बच सको तो आना मेरे पास,
ले आना प्रेम का गुलाल
हम खेलेंगे फगुनिया होली…।

                                                              #सुशील शर्मा

परिचय : सुशील कुमार शर्मा की संप्रति शासकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय(गाडरवारा,मध्यप्रदेश)में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) की है।जिला नरसिंहपुर के गाडरवारा में बसे हुए श्री शर्मा ने एम.टेक.और एम.ए. की पढ़ाई की है। साहित्य से आपका इतना नाता है कि,५ पुस्तकें प्रकाशित(गीत विप्लव,विज्ञान के आलेख,दरकती संवेदनाएं,सामाजिक सरोकार और कोरे पन्ने होने वाली हैं। आपकी साहित्यिक यात्रा के तहत देश-विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में करीब ८०० रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इंटरनेशनल रिसर्च जनरल में भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।
पुरस्कार व सम्मान के रुप में विपिन जोशी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान ‘द्रोणाचार्य सम्मान-२०१२’, सद्भावना सम्मान २००७,रचना रजत प्रतिभा साहित्य सम्मान-२०१६ सहित शिक्षा गौरव सम्मान-२०१६
एवं स्वर्ण प्रतिभा साहित्य सम्मान २०१७ भी मिल चुका है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रंग

Wed Mar 15 , 2017
पहले खुद रंग आना जी, फिर मुझे रंग लगाना जी। श्याम रंग में —मैं रंगी हूँ, दूजा न रंग चढ़ाना जी। प्रेम का मुझे नशा चढ़ा है, मुझे ना देना — ताना जी। गीता-सा जो ज्ञान देवे, वही है —- मेरे कान्हा जी। बड़े जतन सेे आग बुझी, फिर न […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।