सुनो प्रह्लाद….

sushil

सुनो प्रहलाद,कैसे लगाऊं तुम्हें रंग अबीर,
घिरे हो तुम असंख्य होलिकाओं से..
क्या जला सकोगे इन्हें अपनी बुआ की तरह,
राजनीति में षड्यंत्र को होली को।
शिक्षा को सरे बाजार बेचती होली को,
गाँवों को उजाड़ शमशान बनाती होली को।
शहरों को कांक्रीट जंगल बनाती होली को,
पेड़ों पर आरी चलाती होली को।
नदियों को रेगिस्तान बनाती होली को,
किसान को मौत से मिलाती होली को।
बेटियों को क़त्ल कराती होली को,
टीवी चैनलों पर चीखती-चिल्लाती होली को।
अपनी विचारधाराओं को दूसरे पर थोपती होली को,
रोटियों के लिए बचपन को तड़पाती होली को।
अमीरों को सरताज,गरीबों को रौंदती  होली को,
प्रतिभाओं को पीछे धकेलती होली को।
मिसाइलों,परमाणु बमों से खेलती होली को,
खुशियों को बाज़ारों में बेचती होली को।
देश द्रोह के नारे लगवाती होली को।

सुनो प्रह्लाद,इन होलिकाओं से कैसे मुक्ति पाओगे,
कैसे मारोगे देश के अंदर सुलगते दरिंदों को।
कैसे बचाओगे पंखों पर लटकते छात्रों को ?
कैसे सहलाओगे भूख से बिलबिलाई आँखों को ?
कैसे रोकोगे सीमा पार के आतंकों को ?
कैसे रोक पाओगे पर्वतों पर पिघलती बर्फ को ?
कैसे सह पाओगे सर्द सहमी रातों को?
क्या रोक पाओगे स्याह अँधेरे में लुटती अस्मतों को?
क्या रोक पाओगे तुम रेत के लुटते किनारों को?
क्या रोक पाओगे सलीबों पर लटकते किसानों को ?
क्या रोक सकोगे संसद में राजनीति के हंगामे को ?

मुझे मालूम है तुम इन होलिकाओं से घिरे हो अभिमन्यु की तरह ।
फिर कोशिश करेंगी यह होलिकाएँ तुम्हें जलाने की,
अनंत वर्षों से तुम इनसे बचते आ रहे हो।
क्या इस वर्ष भी  बच पाओगे ?
अगर इनसे बच सको तो आना मेरे पास,
ले आना प्रेम का गुलाल
हम खेलेंगे फगुनिया होली…।

                                                              #सुशील शर्मा

परिचय : सुशील कुमार शर्मा की संप्रति शासकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय(गाडरवारा,मध्यप्रदेश)में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेजी) की है।जिला नरसिंहपुर के गाडरवारा में बसे हुए श्री शर्मा ने एम.टेक.और एम.ए. की पढ़ाई की है। साहित्य से आपका इतना नाता है कि,५ पुस्तकें प्रकाशित(गीत विप्लव,विज्ञान के आलेख,दरकती संवेदनाएं,सामाजिक सरोकार और कोरे पन्ने होने वाली हैं। आपकी साहित्यिक यात्रा के तहत देश-विदेश की विभिन्न पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में करीब ८०० रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इंटरनेशनल रिसर्च जनरल में भी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है।
पुरस्कार व सम्मान के रुप में विपिन जोशी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान ‘द्रोणाचार्य सम्मान-२०१२’, सद्भावना सम्मान २००७,रचना रजत प्रतिभा साहित्य सम्मान-२०१६ सहित शिक्षा गौरव सम्मान-२०१६
एवं स्वर्ण प्रतिभा साहित्य सम्मान २०१७ भी मिल चुका है।

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