कामधेनु है धर्म 

ashok mahishware
धर्म शाश्वत् है .अजर अमर अविनाशी है .सृष्टि में जब तक मानव सभ्यता है धर्म भी रहेगा . धर्म क्या है ? जिसे हम धारण करते हैं वह धर्म है .अर्थात धर्म एक ऐसी जीवनशैली है जिसे हम अपने आचरण में स्वेच्छा से स्वीकारत है . मानव जीवन के लिए धर्म की नितांत आवश्यकता है. केवल मानव ही नहीं बल्कि सृष्टि के सारे प्राणी एक निश्चित आचरण संहिता के परिपालन में अपना जीवन व्यतीत करते हैं अर्थात इस सृष्टि का प्रत्येक जीव अपने धर्म का पालन करता है . जीवन में आचरण संहिता का निर्धारण कर हम धर्म का पालन करते .प्राणी जिस आचरण संहिता को स्वयमेव सहर्ष स्वीकार करता है वह धर्म है . धर्म कट्टरपंथ का पर्याय कभी नहीं हो सकता धर्म का उद्देश्य जीवन को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर बनाना है . अपने उद्देश्य की प्राप्ति में वह स्वयं के स्वरूप में बदलाव को भी स्वीकारता है .
         अच्छा धर्म उदार होता है . प्रत्येक युग में धर्म का अपना अस्तित्व रहा है चारों युगों में कलयुग को अधर्मी युग माना गया है . अर्थात कलयुग में धर्म को सबसे कमजोर होना बताया गया है . विद्वजनों के इस  आकलन से मैं असहमत हूँ . यह ऐसा युग है जिसमें धर्म सबसे प्रबल होता है .  धर्म कलयुग की कामधेनु है . इस युग में धर्म का प्रवाह सर्व प्रबल होता है . धर्म की हवा मनुष्य को सतत् झकझोरते रहती है .
          आज प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का भलीभांति ज्ञान है .अपने आराध्य का नारा वह वायुमंडल के जरिए अपने कानों में सुनते रहता है . उसके धर्म का ध्वज सदैव उसके आसपास लहरते रहता है . मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि इतने उत्कृष्ट युग को अधर्मी युग क्यों कहा जाता है ? आज धर्म के जितने ठेकेदार हैं उतने तो किसी युग में नहीं दिखाई दिए .सारा भारत धर्म ध्वज से सजा हुआ है . सबसे बड़ी बात यह कि हमारी सत्ता के हाथ में भी धर्म का ध्वज है .
      यह अलग विषय है कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं . शायद इसलिए हमारे हाथ में धर्म ध्वज है .यदि हम धर्म सापेक्ष होते तो सत्ता  के हाथों धर्म का ध्वज नहीं होता . हमारी सियासत के हाथों में सभी धर्मों का ध्वज सजा हुआ है क्योंकि इन दोनों के पीछे वोट की भीड़ छिपी होती है . सियासत के हाथों बहुरंगी ध्वज चुनाव काल में अवश्य दिखाई देता है ; भले ही इसके पूर्व हम सर्व धर्म समभाव में आस्था रखते हैं .इससे बड़ी भारतीय उदारता और क्या हो सकती है हमारी सियासत के समक्ष गिरगिट लज्जित है . इसने भी उतने रंग नहीं बदले जितनी हमारी रियासत नें ! हमारी सियासत के समक्ष प्रकृति नत्-मस्तक है क्योंकि उसके तीन ही रंग हैं .  वर्षा शीत और ग्रीष्म जबकि हमारी सियासती मौसमों का आकलन कर पाना असंभव है हमारी सियासत के भीतर धार्मिक सहिष्णुता कूट-कूट कर भरी है  कहना वर्तमान परिपेक्ष में  छोटा मुहावरा है .हमें कहना पड़ेगा कि हमारी सियासत के रग-रग में धार्मिक सहिष्णुता बहती है .
    कट्टरता और सहिष्णुता सियासत क दोे मौसम हैं . चुनावी काल में सियासत का सहिष्णु होना आवश्यक हो जाता है . जब  आप बाजार में होते हैं .जेब में चाहे कितना ही रूपया हो यदि आपके हाथ में थैला नहीं है तो आप के हाथ कुछ नहीं लगेगा . चुनाव यही बाजार हैं जबकि धार्मिक सहिष्णुता यही थैला है ; जिसमें सियासत वोट भरती है . वस्तुतः धर्म कामधेनु है !
#अशोक महिश्वरे
गुलवा बालाघाट म प्र

#परिचय

नाम -अशोक कुमार महिश्वरे
पिता स्वर्गीय श्री रामा जी महिश्वरे
माता  स्वर्गीय शकुंतला देवी महिश्वरे
जन्म स्थान -ग्राम गुलवा पोस्ट बोरगांव, तहसील किरनापुर जिला बालाघाट मध्य प्रदेश
शिक्षा स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य एवं अंग्रेजी साहित्य ,बीटीआई व्यवसाय :मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर वर्तमान में शासकीय प्राथमिक शाला टेमनी तहसील लांजी जिला बालाघाट मध्य प्रदेश में पदस्थ हूँ
लेखन विधा गद्य एवं पद्य
प्रकाशित पुस्तकें: प्रकाश काधीन १/साझा काव्य संग्रह २/नारी काव्यसंग्रह
प्रकाशक साहित्य प्रकाशन झुंझुनू राजस्थान

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।