तो चलूं…

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ramesh

शहीदों पर लरजता दिल संभालूं तो चलूं,
अश्रु उनके परिजन के छुड़ा लूं तो चलूं।

अपनों में कई रंग भाते नहीं ‘निर्झर,
सबको इक रंग में रंग लूं तो चलूं।

अबकी होली कुछ इस तरह मनाई जाए,
भ्रष्टाचार उन्मुक्तता होली में जलाया जाए।

हो रहे बदरंग रिश्ते ‘निर्झर’ इस संसार के,
प्रेम के इक रंग में सब जग को रंगाया जाए।

फिर नई सौगात ले रंगीली होली आई है,
रंगों की उमंग संग नबेली होली आई है।

टेसू भये हैं लाल,अंबर उड़ रही गुलाल,
छोड़ छल कपट मलाल संदेशा होली लाई है।

बिना खाए पान अधर यूं लाल करते हो,
बिना रंग लोगों के गुलाबी गाल करते हो।

नज़र नीची भवें तिरछी अधर हल्के लहराए,
बिना शब्दों के बतियाते ‘निर्झर’ कमाल करते हो।

#रमेश शर्मा ‘निर्झर’

परिचय  : रमेश शर्मा ‘निर्झर’ चांदामेटा निवासी हैं तथा बैंक आॅफ महाराष्ट्र परासिया में सेवारत हैं। गद्य व पद्य दोनों लेखन में रुचि है। वर्तमान में श्रीमद् भागवद्गीता का पद्यानुवाद राधेश्याम धुन में पूर्ण कर चुके हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।