तो चलूं…

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ramesh

शहीदों पर लरजता दिल संभालूं तो चलूं,
अश्रु उनके परिजन के छुड़ा लूं तो चलूं।

अपनों में कई रंग भाते नहीं ‘निर्झर,
सबको इक रंग में रंग लूं तो चलूं।

अबकी होली कुछ इस तरह मनाई जाए,
भ्रष्टाचार उन्मुक्तता होली में जलाया जाए।

हो रहे बदरंग रिश्ते ‘निर्झर’ इस संसार के,
प्रेम के इक रंग में सब जग को रंगाया जाए।

फिर नई सौगात ले रंगीली होली आई है,
रंगों की उमंग संग नबेली होली आई है।

टेसू भये हैं लाल,अंबर उड़ रही गुलाल,
छोड़ छल कपट मलाल संदेशा होली लाई है।

बिना खाए पान अधर यूं लाल करते हो,
बिना रंग लोगों के गुलाबी गाल करते हो।

नज़र नीची भवें तिरछी अधर हल्के लहराए,
बिना शब्दों के बतियाते ‘निर्झर’ कमाल करते हो।

#रमेश शर्मा ‘निर्झर’

परिचय  : रमेश शर्मा ‘निर्झर’ चांदामेटा निवासी हैं तथा बैंक आॅफ महाराष्ट्र परासिया में सेवारत हैं। गद्य व पद्य दोनों लेखन में रुचि है। वर्तमान में श्रीमद् भागवद्गीता का पद्यानुवाद राधेश्याम धुन में पूर्ण कर चुके हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।