जब लाल किले की चोटी पर तिरंगा लहराता है
हर एक भारतवासी का सीना छप्पन इंची हो जाता है!!
जल, थल और नभ के सैनिक जब करतब नए दिखाते हैं
दुनियां भर के देशों को अपना सामर्थ्य बताते हैं
तब पर्वतराज हिमालय भी महिमामण्डित हो जाता है!!
एक दिन एक समय तिथि एक सब मिलकर
” जन गण मन “गाते हैं
जब लाल किले में मिलकर हम सब आजादी का जश्न मनाते हैं
वन्देमातरम की गुजों से मन विभोर हो जाता है!!
जब लाल किले की चोटी पर तिरंगा लहराता है…………
ये अपनी आजादी बस वीरों की थाती है
लाखों वीरों ने जन्म लिया ये ऐसी पावन माटी है
जो मरके भी अमर रहे, ये उनकी अमिट निशानी है
भगतसिंह,अशफाक, आजाद के बलिदानों की कहानी है
ये स्वतन्त्रता दिवस सदा ही नवयुगों की गाथा गाता है
बलिदानों का मंजर तब आँखों में उतर के आता है
लाल किले की चोटी पर जब तिरंगा लहराता है………….
लाल किले को जब इस दिन दुल्हन सा सजाया जाता है
सच्ची आजादी का मतलब दुनियां बताया जाता है
हमको अपने आजादी पर गर्व सदा ही होता है
भारत माँ की चरणों को जब ये निर्मल सागर धोता है
अमर शहीदों की टोली तब स्वर्ग में भी हर्षाती है
जब वीरों की गाथा बागी कलम कोई लिख जाती है
तब सन सैतालिस वाला मंजर याद आ जाता है
लाल किले की चोटी पर जब तिरंगा लहराता है………….
ये विजयी विश्व तिरंगा प्यारा का जो अद्भुत नारा है
हम सब भारत के वासियों को अपनी जान से प्यार है
जब तक साँस रहेगी तन में मन ये गीत दुहरायेगा
इस झंडे की शान के आगे सारा भूमण्डल थर्राएगा
मैं भारत की बेटी हूँ मुझे गर्व सदा ये रहता है
ऐसे ही कोई विश्वगुरु थोड़ी भारत को कहता है
भारत माता की गाथाओं का मैं प्रतिपल गुणगान लिखूं
जब,जब अपनी कलम उठाऊँ
तब,तब मैं हिंदुस्तान लिखूं!!
जब जब अपनी कलम उठाऊँ
तब तब मैं हिंदुस्तान लिखूं!!
जब लाल किले की चोटी पर तिरंगा लहराता है
हर एक भारतवासी का सीना छप्पन इंची हो जाता है!!
#गरिमा सिंह
परिचय-
नाम- गरिमा अनिरुद्ध सिंह
साहित्यिक उपनाम-मधुरिमा
राज्य-गुजरात
शहर-सूरत
शिक्षा- एम ए प्राचीन इतिहास
कार्यक्षेत्र-शिक्षण
विधा – हास्य ,वीर रस ,शृंगार