शहर के वरिष्ठ साहित्यकार दम्पत्ति श्री शशि तिवारी एवं श्रीमती कमलेश तिवारी का काव्य संग्रह ‘कलरव’ विमोचित

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गोंदिया।
कविता लिखी नहीं जाती समय, परिस्थिति व वातावरण कवि मन को प्रेरित करता है और कलम कविमन के भावों को शब्दों
के प्रवाह मेंं ढाल देती है जो कविता हो जाती है। कलरव कवि दम्पति शशि तिवारी व श्रीमती कमलेश तिवारी की कविताओं का ऐसा ही एक गुंजन है, जिसमें समसामयिक मानवीय चहचहाहट प्रतीत होती है। उपरोक्त उद्गार डॉ.प्रभाकर गुप्त ने शहर के जाने-माने साहित्यकार तिवारी दम्पत्ति हास्य-व्यंग्य कवि श्री शशि तिवारी एवं श्रीमती कमलेश तिवारी के संयुक्त काव्य संग्रह ‘कलरव’ के विमोचन प्रसंग पर व्यक्त करते हुए अपनी शुभकामनाएँ दी।
विमोचन कार्यक्रम विगत रविवार, दि. 8 जुलाई 2018 को दोपहर 3 बजे होटल बाबुल इन में सम्पन्न हुआ। जिसकी अध्यक्षता राजस्थानी ब्राह्मण सभा ट्रस्ट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्री बजरंगलाल शर्मा ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में पूर्व प्राचार्य डॉ.प्रभाकर गुप्त, प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री डॉ.प्रा.वर्षा गंगने देवरी, वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार श्री माणिक गेडाम, कविवर प्रेमप्रकाश त्रिपाठी बालाघाट के साथ ही सत्कार मूर्ति श्री शशि तिवारी एवं श्रीमती कमलेश तिवारी मंच पर विराजमान थे। शुभारंभ माँ शारदा की प्रतिमा के पूजन, माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
प्रस्तावना में शहर के प्रसिद्ध वक्ता एवं कवि रमेश शर्मा ने कवि दम्पति की सुपुत्री श्रद्धान्विता तिवारी शर्मा को इस काव्य संग्रह की प्रेरणास्रोत बतलाते हुए कवि दम्पति की चालीस वर्षीय काव्य साधना पर प्रकाश डाला। समीक्षक माणिक गेडाम ने काव्य संग्रह की कविताओं की सुंदर समीक्षा प्रस्तुत करते हुए अधिकांश कविताओं को नब्बे के दशक के पूर्व लिखित एवं दोनों की समसामयिक संदर्भो पर सहज व सारगर्भित प्रस्तुति निरुपित करते हुए सभी कविताओं का बारीकी से विश्लेषण कर दोनों को असीम बधाइयाँ दी।
विशेष अतिथि डॉ.वर्षा गंगणे ने दाम्पत्य जीवन के साथ सफल कवि दाम्पत्य जीवन का कलरव काव्य संग्रह को उदाहरण निरूपित किया। कवि प्रेमप्रकाश त्रिपाठी ने अपने पारिवारिक एवं कवि जीवन के आरंभिक दिनों का उल्लेख करते हुए एक लंबे समय से प्रतीक्षारत अभिलाषा की पूर्णता पर दोनों को आत्मिक बधाइयाँ दी। मराठी के सशक्त कवि समीक्षक युवराज गंगाराम ने शाल व पुष्पगुच्छ से कवि दम्पति का सम्मान कर रचनागत विशेषताओं के लिए कवयित्री कमलेश तिवारी की खुलकर सराहना की एवं शशि तिवारी की कुछ कविताओं पर अपने समीक्षात्मक उद्गार रखे। वरिष्ठ कवि के.बी.चौव्हान गुरूजी ने अपनी कविताओं के माध्यम से दोनों को शुभकामनाएँ प्रदान कर पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया। कवि छगन पंचे ने अपनी विशेष काव्य शैली में अपने विचार रखे। कवि एवं कार्यक्रम के व्यवस्थापक चंद्रेश माधवानी ने कलरव के विमोचन समारोह को गुरुसेवा की संज्ञा देते हुए कलरव शब्द की सुंदर विवेचना की। कवयित्री सरिता सरोज ने गीत की पंक्तियाँ गुनगुनाते हुए समारोह  को आनंदित किया। मित्र परिवार से जितेंद्र तिवारी, घनश्याम गुप्ता,महेन्द्र जायसवाल, सत्यनारायण खंडेलवाल, मनोज तिवारी, श्रीमती मनोरमा रमेश शर्मा,उर्मिला छगन पंचे, कवयित्री सुषमा यदुवंशी, किंजल मेहता,नूरजहां पठान आदि ने भी पुष्पगुच्छ से कविदम्पति का अभिनंदन किया। समारोह अध्यक्ष पं.बजरंगलाल शर्मा ने कविताओं के प्रति अपनी रूचि प्रदर्शित करते हुए कविदम्पति को स्वस्थ आनंदित जीवन हेतु शुभकामनाएँ दी व साहित्य मंडल में शशि तिवारी की सेवाओं की सराहना की।
इस प्रसंग पर कवि लक्ष्मीकांत कटरे के काव्य संग्रह चिकोटी के पिछले दिनो प्रकाशन व कवि निखिलेशसिंह यादव को रायगढ़ में एक साहित्यिक संस्था द्वारा प्रदत्त सम्मान के लिए प्रमुख अतिथियों के हस्ते सम्मानित किया गया। अ.भा.साहित्य परिषद महाकौशल की बालाघाट जिला इकाई के पदाधिकारी प्रेमप्रकाश त्रिपाठी एवं सुषमा यदुवंशी ने सम्मान पत्र प्रदान कर कवि शशि तिवारी व कवयित्री कमलेश तिवारी का सम्मान किया। गरिमापूर्ण कुशल संचालन करते हुए कवि रमेश शर्मा ने समारोह को चिर स्मरणीय ऊँचाई प्रदान की। साहित्य मंडल के सचिव मनोज एल.जोशी ने संस्था के लिए कलरव के प्रकाशन को गौरव बतलाते हुए उपस्थित मान्यवरों का हार्दिक आभार माना। समारोह मेंं नगर के साहित्यिक व गणमान्य व्यक्तियों मेंं सर्वश्री डॉ.हरिनारायण चौरसिया पूर्व प्राचार्य, कवि प्रकाश मिश्रा, एड.शाहिद अंसारी ‘शफक’, विजय जैन, अशोक सक्सेना, डॉ.प्रशांत कटरे, दीपक मिश्रा, श्याम चंदनकर, अरूण दुबे, गायक कलाकार बिपिन शाह, रामू ढोरे, नरेश आर.गुप्ता,मनोज बोरकर ‘मुसव्विर’,लक्ष्मीकांत कटरे, निखिलेशसिंह यादव, चैतन्य मातुरकर, नीरज ब्राह्मणकर, श्रीज्ञान चौव्हान, सुरेंद्र जगने, भाऊराव भस्मे, अशोक चन्ने सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही।
#निखिलेशसिंह यादव

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।