हिन्दी पुत्र

cropped-cropped-finaltry002-1.png

एक बार हिन्दी अपने घर मे बहुत ऐस्वर्य से रह रही थी. हिन्दी का बहुत बड़ा  साम्राज्य था. हिन्दी अत्यंत उदार थी. उसकी भावनाए अत्यंत उच्च थी. “वसुधैव कुटुंब ”
और “अतिथि देवो भव “उसके सिधान्त थे. हिन्दी की ख्याती दूर -दूर तक थी

दूर परदेश मे अंग्रेजी रहती थी .एक दिन अंग्रेजी ने हिन्दी के ऐश्वर्य का डंका सुना, और वो हिन्दी से मिलने को आतुर हो गयी. वो अपने ऐश्वर्य का डंका लेकर हिन्दी के घर पहुँची ,उसने हिंदी के द्वार खट्खटाए. हिन्दी ने बहुत बडप्न से उसका स्वागत किया.

         हिन्दी का उसके घर मे ऐस्वर्य और साम्राज्य देख अंग्रेजी के मन मे उसे हड़प करने का लालच आ गया. उसने हिन्दी का ओहदा अपनाने की भरसक कोशिश की. पहले उसने हिन्दी को तरह -तरह के प्रलोभन दिये, उसे मार्ग से विमुख करने की कोशिश की, पर हिन्दी देव वानी थी, वो उसके  बह्कावे मे न आई.

          तो उसने लालच के विष की कुछ बूँदे हिन्दी के भोजन मे मिलाई और चुपके से हिन्दी को पिला दी, हिन्दी का दम घुटने लगा.

           तभी वहां हिन्दी की मां संस्कृत आई, वो उसे वैद्य के पास ले गयी. वैद्य ने हिन्दी की जान तो बचा ली, लेकिन जहर गहरे तक असर कर चुका था इसलिए हिन्दी की हालत गंभीर हो गयी,.

           अंग्रेजी ने उसका ओहदा अपना लिया और उसे उसके घर मे ही बन्दी बना लिया. बेचैन माँ संस्कृत ने वैद्य जी से पूछा कि क्या हिन्दी कभी अंग्रेजी के चंगुल से आजाद नही होगी, तो वैद्य जी ने कहा कि हिन्दी हाल ही मे माँ बनी है, जिस दिन इसका बेटा “आत्म विश्वास बडा हो जायेगा, वो अपनी माँ को अंग्रेजी के चंगुल से निकाल लेगा. और एक दिन फ़िर उसका ऐस्वर्य होगा.

            और वो दिन आ चुका है.

                                                     #श्वेता जायसवाल

matruadmin

Next Post

साम्प्रदायिक हिंसा

Tue Jun 12 , 2018
आंधियां नफरतों  की कुछ ऐसी चलने लगीं फिज़ा मेरे शहर की वो देखो बदलने लगी हर जगह कत्लेआम है हर  गली सन्नाटा हुआ लोगो की खुशियों को ममता नफरतें निगलने लगीं आंधियां नफरतो …….. हर आदमी सहमा यहाँ एक दूसरे से डर रहा दोस्ती के रिश्तों में भी नफरते घुलने […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।