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खो सा गया वो दुनिया के मेले में, पास था कितना अपने वो अकेले में। भुलाकर वो खुद को खुद, पड़ा वो दुनिया के झमेले में। क्यों है तन्हा तू अब भी,संग दुनिया, रहकर भी सोचता है वो अकेले में। इससे बेहतर तो तू तब था जब तू, खोया था […]

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मन का दर्पण देख नर,बाहर भरम अथाह। भेद मिटे सारे सहज, अटल रहे उत्साह।। दर्पण को देखा हुआ, मायावरण विमोह। मन की खिड़की जब खुली,मिटा भरम सब मोह।। दर्पण दर्शन सूरत अरु,बाल क्रिडन त्रय ठाम। भूले से नहि आत है,हरि वल्लभ कौ नाम।। सत्य कहाँ दर्पण कहे,मनचीता कह पाय। मन […]

छिन्न-भिन्न कर दीजिए,उनके सारे अंग, जो सैनिक को पीट कर,दिखा रहे थे रंग।। फारुख अब्दुल्ला कहे,’राइट’ पत्थरबाज, सेना को ही सौंप दो,खल का करे इलाज।। मणिशंकर चिल्ला रहा,जैसे ऊदबिलाव, इसे जीप पर बाँधकर,इक-दो गली घुमाव।। बेशर्मी की हद करे,सुश्री शबनम लोन, कोई मुझको दीजिए,इस हरहठ का फोन।। महबूबा के मोह […]

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माँ का दिल न जाने किस फौलाद का बना होता है, औलाद की हर तपन सहता है। माँ का दिल न जाने किस मिट्टी का बना होता है, रोज आँसूओं की असीम बारिश सहता है फिर भी नहीं गलता है। माँ का दिल घर की विपत्ति में चट्टान-सा अड़ा होता […]

शूल मेरे गाँव के अब,फूलों से भी प्यारे लगे, शहरों में रहते हुए,जी-सा भर आया है। माँ की नहीं गोद यहाँ,पिता का आदर्श नहीं, कांक्रीट का वन यहाँ,लोगों ने बसाया है।। सुबह से शाम यहाँ,यादों में गुजरती हैं। आता न समझ यहाँ,अपना पराया है।। छूट गए घर द्वार,रिश्तों की खबर […]

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जिन्दगी का हर फसाना याद आएगा, तुम्हारा रुठना-मेरा मनाना याद आएगा। है भले ही दौर तुम्हारा मगर ये जान लो। तुमको फिर बीता जमाना याद आएगा। बात जब छिड़ जागी कसमों-वादों की कहीं। मुकर जाना तुम्हारा,मेरा निभाना याद आएगा। होंठों पर आए मगर गा नहीं सकते कभी। वो अधूरा तुमको […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।