जय महेश शिव शंकर भोले। डम ढम डम ढम डमरू बोले।। कैलासी काशी के वासी। सत्य सनेही शिव अविनाशी।।१ भक्त सन्त शिवरात्रि जगाए। द्वेष दोष भव दूर भगाए।। मर्त्य मनोरथ मनुज जागरण। सृष्टि हेतु रचि नव्यआभरण।।२ गज गणेश गौरी गो नन्दी। कार्तिकेय केकी कालिन्दी।। चंद्र गंग सिर जटा विराजे। भूत […]
