घर-ऑंगन में जो फुदका करती थी, दाना चुंगकर ठंडा पानी पीती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं सी गौरैया ? चीं-चीं, चूं-चूं हरदम करती थी, बरसात में पंख फैलाकर नाचा करती थी । कहॉं गई वो प्यारी नन्हीं सी गौरैया ? तिनका-तिनका इकट्ठा करती थी, सुंदर सा नीड़ निर्माण […]
