हर रात सुलझा कर सिरहाने रखते है जिंदगी। सुबह उठते ही उलझी पड़ी मिलती है जिंदगी।। सुलझा सुलझा कर थक जाते हैं हम ये जिंदगी। थकती नहीं ये जिंदगी,सुला देती हमें ये जिंदगी।। बेवफ़ा हम नहीं,बेवफ़ा हो जाती है ये जिंदगी। भरोसा इस पर कैसे करे,बे भरोसे है ये जिंदगी।। […]
परीक्षा के निकट आते ही छात्रों की दिनचर्या अनियमित होने लगती है जिससे छात्रों का समय व्यवस्थापन, खानपान, आराम का समय, खेलकूद, मनोरंजन सभी की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाता है। छात्रों के संवेगात्मक अवस्था में नकारात्मकता अधिक होने से उनकी संज्ञानात्मक क्षमताएं (सीखना, स्मृति, चिंतन, प्रत्यक्षीकरण व अन्य) ठीक से […]
