ये कैसे जमाना आया है,ये दुनिया कहां जा रही है। जैसे किए हैं कर्म इसने,वैसे ही ये फल पा रही हैं।। पेड़ काट काट कर दुनिया,प्रकृति का दोहन कर रही है। आज मुर्दे को जलाने के लिए लकड़ी भी न मिल रही हैं। ये कैसे संस्कार है दुनिया के अपनी […]

भारतवर्ष सदैव से एक अलौकिक राष्ट्र रहा, जहां अपने महापुरुषों का स्मरण करने की परंपरा रही है। अनेक सन्तों, वैज्ञानिक, क्रांतिकारियों की जन्मभूमि होने के कारण भारत विश्व मे आध्यात्म का केंद्र ही नही रहा अपितु अपनी भूमिका को भारत ने विश्वगुरु बनकर सदैव निभाया भी है। आज से लगभग […]

इंसान की गलतियों का फल भोग रहे हम। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा।। विश्वगुरु बनने के चक्कर में दो देश में छिड़ गई जंग। बाकी पीछे पीछे हो लिए देकर अपना समर्थन। सबके लिए मिला है अब ये प्रसाद बराबर।। यही दुर्भाग्य हमारा यही दुर्भाग्य हमारा। इंसान की गलतियों […]

ज़माने की हवा बदल रही हर दिन, कहाँ चले गये अब वो बहार के दिन, ख़त्म हो चला इंसानियत का दौर , हर तरफ़ आँसू दर्द शोर ईद के दिन । चाँद , सूरज, हवा सब ग़मगीन है, कौन खुश है इस बार ईद के दिन । हर तरफ़ है […]

बाबा बोतलदास आज पूरी तरह कोरोना के कारण मीडियाकर्मियों की मौत पर चर्चा करने के मूड में थे। सड़क पर मिलते ही सबसे पहले मुझसे पूछा ठीक तो हो। मैंने कहा ऐसा क्यों पूछ रहे हैं ? रोज तो मुलाकात होती है और भला चंगा नजर आता हं। वे बोले- […]

जैसा दुसरो से चाहते हो ऐसा करे सबसे बर्ताव दुसरो से अगर अपनत्व चाहिए स्वयं भी अपनत्व अपनाना होगा जैसा कर्म किया वैसा ही भरना होगा फल को लेकर क्यों है तनाव ख़ुशी चाहिए तो खुशिया बांटो समाज को टुकड़ो में न बांटो एकता का मार्ग ही अच्छा विकारमुक्त जीवन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।