सिया राम चरणों में वंदन। मेटो अब कलयुग का क्रंदन।। जब जब बढ़े पाप का भारा। तब तब प्रभु तुम ले अवतारा।। त्रेता माहि भया रिपु भारी। सुर नर मुनि का कष्टनकारी।। रावण नाम सकल जग जानी। दस शीशों का वह अभिमानी।। कलयुग माहि जनम पुनि लीन्हा। घोर तपस्या विधि […]
