जब भी मैं भारत बने भारत अभियान का प्रस्तुतीकरण करती हूँ, जब मैं कहती हूं कि अपने देश के लिए सिर्फ एक ही नाम प्रचलित हो “भारत” तो जो हृदय से भारतीय हैं वे इसे सहर्ष स्वीकार करते हैं बिना किसी कुतर्क के पर हजारों में कोई एक सिरफिरा इंडियन […]

        “ये दुनिया देखेगी’ द्वार से निकली दर्द-ए-कराह तो, ये दुनिया ही तुझे हँसकर देखेगी… मत बन तू गुमनाम इस जहां में, ये दुनिया ही तुझे डसकर देखेगी… बनाती रही खुद का तमाशा तू, तमाशबीन ये तुझे बनकर देखेगी.. झुकी रही अगर कदम-ब-कदम तू, ये पूरी दुनिया […]

इश्क में तेरे अब मेरा क्या हाल हो गया, जीने लगा अब मैं, वाह क्या कमाल हो गया, अजनबी,अनजान,अजीबोगरीब था पहले मैं, अब तेरे इश्क-ए-रहमतों से मैं मजबूत ढाल हो गया, न ही नींद,न ही ख्वाब आते थे पहले मुझे, अब तो तेरे रंगीन खयालातों से मालामाल हो गया, बेअसर,बेढंग,बेरंग […]

बड़े सुंदर उजियाले थे,जब गाँव के घरों में छोटे से आले थे। दिल मे सच्चाई थी,जब गाँव के चूल्हे पर बनते निवाले थे।। एक साथ चूल्हे के सामने बैठकर खाना खाते भाई सभी। एक दूसरे के लिए मन से साफ,कभी ना मन के काले थे।। लालटेन की रोशनी में रात […]

जो स्वपन मे जीता है उसका जीवन रीता है जो स्वपन को साकार करे लक्ष्य रख प्रयास करे प्रतिफल वही पाता है जीवन सुखमय हो जाता है जीवन को स्वर्णिम बनाने को आत्मिक हर्ष पाने को स्वपन लक्ष्य का जो बुनता है सद्कर्म वही तो करता है वही सच्चा मानव […]

चलो कोशिश करते हैं जीवन को कसमों की डोरी में रस्मों की गंध से अलंकृत कर दें चलो कोशिश करते हैं हिना के रंग को स्नेह अभिव्यक्ति के अनमोल पलों से अमर कर दें चलो कोशिश करते हैं अपरिचिति श्वासों को हवन कुंड की अग्नि के समक्ष एक दूजे में […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।