. *1* हाँसी,खाँसी खो दिया,कितरा ही परिवार। साँसी बात शराब री, डूब गया घर बार। डूब गया घर बार, गरीबी घर मैं छाई। दारू को है शौक, मिलै नहि घर में पाई। कहे लाल कविराय, यही कंठा री फाँसी। कर शराब को त्याग,करै ली दुनिया हाँसी। . *2* दारू दुख दारिद्रता, दुश्मन […]
डोगरी एवं हिंदी भाषा के युवा बाल साहित्यकार, लघुकथाकार, कथाकार, कवि, आलोचक,लेखक, अनुवादक, भाषाविद्, सांस्कृतिककर्मी एवं समाजसेवी यशपाल निर्मल को उनके साहित्यिक योगदान के लिए के. बी. साहित्य समिति (पंजी0) बदायूं, उत्तर प्रदेश की ओर से डा. रघुवंश स्मृति सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। इस बात […]
