कल-कल    छल-छल  बहती  नर्मदा, जग   की  प्यास    बुझाती   नर्मदा। हरे     भरे     से     बाग    तीर     पर, सबका       सिंचन     करती   नर्मदा। त्रिविध       ताप      से       देती मुक्ति, चार         पदारथ     देती       नर्मदा। […]

गोरे-गोरे गाल में,काले-काले बाल में, मदमाती चाल में आ गया बसंत है। चंचल से नैन में,मादक से बेन में, गदराई देह में आ गया बसंत है। प्रेम के संदेश में साजन के देश में, नए परिवेश में आ गया बसंत है। अँगना मा खड़ी गोरी ईलू-ईलू बोल रही, उसके लबों […]

कभी अपने से कभी, गैरों से छले गए रिश्ते।             मतलब की कढ़ाही में             तले गए रिश्ते॥ रोते रहे सिसक-सिसक, कर बेचारे अकेले में।             आंसूओं को पीते रहे,           […]

हे पावन से दीप, धरा का तम हर दो। जग के कण-कण में, सुंदर आभा भर दो॥ राग-द्वेष का नाम, मिटे मानव मन से। निर्मल बुद्धि का जन, जन को वर दो॥ ज्ञान की सरिता, बहे फिर विश्व में। मरूभूमि के आंगन में, सागर कर दो॥ गीत गूँजे सदा, हर्ष […]

रिपु हो तम के तुम दीप, गंधुमी आभा बिखेरते दीप। हर्ष विशाद में तुम जले हो, सब के प्रिय रहे हो दीप। दर्शन अर्चन में रहे हो संग, नीरांजन में जले हो दीप। उमंग उत्सव का श्रृंगार तुम, संस्कृति की पहचान हो दीप। मस्तक सजा पावक पुँज, रजनी में तुम […]

प्रीत के उपवन में, मिलन का मधुमास है। खिल रही कली-कली, सुगंध की सुवास है।। ह्रदय में मचल उठी, सोई-सी प्यास है। नयना मतवारे हुए, प्रेम लिए आस है।। मादकता बरस रही, भाव का विलास है। मचल उठी चंचल-सी मोह की मिठास है।। मिलन की रितु छाई, महक लिए मास […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।