बदल जाती है तारीखें यहाँ वक्त भी हरदम बदल जाता यहाँ अपने अपने ना रह पाते यहाँ तो भला गैरों से शिकवा कैसा? मुलाकात होकर भी बात नही होती साथ रहकर भी एहसास नही होता बयां करके भी खामोशी नही टूटती तो भला नादानों से शिकवा कैसा? बादल होकर भी […]

एक तेरा ख्याल ही है जो दिल से जाता नहीं, अब इस दिल को तेरे बगैर कोई और भाता नहीं। तुझसे बिछड़ने के ख्याल से मन भर जाता एक तेरा ख्याल ही है जो मरने नहीं देता। इसी ख्याल से मैं हूं जिंदा अब तक तेरे दामन में समेटे हुए […]

मैं एक नारी हूं, कर्तव्य पथ पर अडिग हूं, संघर्ष पथ पर अटल हूं सुख दुःख की सांझी हूं हां मैं एक नारी हूं ‌। अपनों की खातिर, प्रीत निभाती, हर फर्ज निभाती, मुश्किलों को आसान बनाती, होकर भी ना हो पाती, हां मैं एक नारी हूं। जीवन की बलि […]

बेटी का दर्द। करती पूरे घर के अरमान, देखते जो आप सपने महान, अगर मैं बेटा होता। कंधे से कंधा मिलाकर चलती, फिर जिंदगी यूं झटपट दौड़ती, मन में ना रहती टीस, ना होती किसी बात की खीझ, अगर मैं बेटा होता। भर देती दामन खुशियों से, मां के आंचल […]

देखो देखो आया है , आज बसंत देने हमको उपहार अनेक । करके अपार श्रृंगार इसने , सिखाया है हमको सज धज कर रहना। मौसम की बहार लाया बसंत जीवन के दुखों को हर लाया बसंत। सजी दुल्हन सी ये धरती, मन में उमंग सी ये भरती, घोले मन में […]

आज सीताराम चौकसे(सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर) की वृद्धाश्रम में मृत्यु हो गई थी। पूरा आश्रम शोकाकुल था,रिया फूट-फूटकर रोए जा रही थीl इसका दादाजी से कोई खून का रिश्ता नहीं था, सिर्फ एक संवेदना थी जो उसे इन बुजुर्गों के पास रोज खींच लाती थी,पर आज वह ऐसे रो रही थी जैसे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।