इस बार जब तुम आना फिर छोड़ कर मत जाना प्यार के इस समुंदर में जब तुम गोता लगाना वापस कभी मत जाना।। मेरे दिल की इस बाग को हरदम हरियाली रखना सुख जाय अगर यह बाग प्यार की नीर से सिच देना । प्यार मै इस कदर करु तुमसे […]

बच्चपन की धुधली सी यादें होठो की प्यारी सी मुस्कुराहट घंटो एक दूसरे को तंग करना शायद अब याद आ रहा है ।। स्कूल दिनो की वो मस्ती बिना मतलव का झगरना एक दूसरे को नीचा दिखाना शायद अब याद आ रहा है ।। अपनी नटखट पन से कभी कृष्ण,तो […]

भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है, सरकार से सम्बंधित सारी योजना को जन- जन तक पहुँचाने में तथा जनता की आवाज को सरकार तक पहुचाने में मीडिया का अद्वितीय योगदान है,और इतना ही नहीं गाँव की हर छोटी-बड़ी घटना को समाचार पत्र के माध्यम से […]

होली का यह रंग,है कितना मनमोहक, लाल,गुलाबी,नीला,काला,पीला, भाता   सभी  को  यह  खूब  है।। आओ हम सब मिलकर होली मनाएँ, प्यार-मोहब्बत का रंग खूब पिरोये। दुश्मनी  भूल  कर दोस्ती  का  रंग, हम  सब  मिलकर  खूब  लगाये।। मेल जोल का सिलसिला तो यूं चलता रहेगा, आओ हम सब मिलकर कुछ नया कर […]

पुराना साल जाने वाले है,उनको अलविदा नया साल आने वाले है, उनको नमस्कार।। कैसे-कैसे  कठिनईयां आई पुराने साल में कैसे-कैसे   घटना-घटी जिंदगी की राहे  में कुछ गलतियाँ हुई  पुराने साल में,अनजान कुछ सिख की नई अनुभव मिली इस जहाँ में।। कुछ दोस्त बने पुराने साल की इस सफर में कुछ […]

है,प्रित जहाँ की मैं बात वहाँ का करता हूँ,  हिन्दुस्तान  का रहने वाला हूँ हिन्दी में बात करता हूँ । लोग मुझे जो  कहे  प्रवाह नही मुझे कुछ और नही,बस हिन्दी में , बात करना आता है । अंग्रेजी,चीनी,रुसी,है बिदेशी इनकी  बात मैं क्यो करु हमारी प्रिय भाषा है,हिन्दी मैं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।