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अरमान था बहारों का

दिल में अरमान था  बहारों का और तोहफा मिला है खारों का । तेरे बगैर बता मै अब क्या करूँ इन बेजान दिलकश नजारों का । रौशनी जब   मुझे खलने…
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क्या धुलेंगे पाप शाही स्नान से

धुलेंगे पाप क्या  शाही   स्नान से ? बात करते हो बिलकुल नादान से । मोह,माया ,छल ,कपट,लोभ,हिंसा छूट पायेगा क्या आज  इन्सान से । बचाना होगा खुद से  ही खुद…
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चाँद बनके रातों को छत पे बुलाते क्यों रहे

जब मोहब्बत था तो छुपाते क्यों रहे आग समंदर में फिर लगाते क्यों रहे ।।1।। जब जाना था ज़माने में रुसवा करके तो भरी महफ़िल में हक़ जताते क्यों रहे…
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अन्तर्द्वन्द्व – ‘सोच’ की अतिरिक्तता तथा सामान्यता

           ज़िंदगी के कई दिन और कई राते यूँ हीं गुज़र जाते हैं । यही सोचते-सोचते कि आख़िर क्या हम वही सोच रहे हैं, जो हमें…
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वर्गीकृत भारत – लोकतंत्र का विकल्प

           लोकतंत्र की पृष्ठभूमि रचते हुए व्यक्ति के अधिकारों और स्वतंत्रता को पुरज़ोर रूप में स्थापित किया गया । यह कल्पना की गई कि प्रत्येक व्यक्ति…
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 क्या वर्गीकृत भारत, एक सच्चाई है?

           भारत की विशालता एक समय में कितनी रही होगी और उस विशालता में समाहित हुआ भूगोल और भूगोल के साथ उससे जुड़ा सम्पूर्ण इतिहास, कितना…
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