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ajay prasad

मेरी उम्मीदों पर खरा उतरेगा न ?
मुझसे बिछड़ कर तू बिखरेगा न ?
जुदा हो कर मरना जरूरी नहीं है
मगर जिंदा रहना तुझे अखरेगा न ?
न याद करना कभी,न आसूँ बहाना
हाँ,पर चाँद रात को आहें भरेगा न ?
कोई इल्जाम तुझ पर न आने दूँगा
तू मेरा हौसला अफजाई करेगा न ?
अब खुदा जाने तेरे दिल में क्या है
अजय अपने दिल की ही करेगा न ?

#अजय प्रसाद 
नालंदा(बिहार )
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http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2019/02/ajay-prasad.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2019/02/ajay-prasad-150x150.pngmatruadminUncategorizedकाव्यभाषाajay,prasadमेरी उम्मीदों पर खरा उतरेगा न ? मुझसे बिछड़ कर तू बिखरेगा न ? जुदा हो कर मरना जरूरी नहीं है मगर जिंदा रहना तुझे अखरेगा न ? न याद करना कभी,न आसूँ बहाना हाँ,पर चाँद रात को आहें भरेगा न ? कोई इल्जाम तुझ पर न आने दूँगा तू मेरा हौसला अफजाई करेगा न ? अब...Vaicharik mahakumbh
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