बेटियाँ इतिहास रचती हैं देश का मान रखती हैं , उड़ाने  उनकी हैं ऊँची दिल में तूफ़ान रखती हैं । कलाई उनकी है नाजुक यही अब तक सुना हमने, हाथ में है बड़ी ताक़त है  हथेली जान रखती हैं । कभी सीता कभी राधा कभी घोषा अपाला थी , आज […]

आज के दौर की तालीम जो सरकारी है , उससे क्या फ़ायदा वो तो बस बाज़ारी है । काम आती है आग पेट की बुझाने को , है नही क़ौम की परवाह न ज़िम्मेदारी है । होड़ सी है मची डिगरी को हड़प लेने की , देश में भीड़ है […]

वो गोली आज तक  छलनी है करती जानों दिल अपने , है जलियाँबाग का मातम मेरी आँखों में बचपन से । भगत सिंह नाम है मेरा मैं फ़ौलादी हूँ तन मन  से, मेरा चोला बसंती  रंग दिया है माँ ने बचपन से । क़सम खाता हूँ मैं अपनी हर इक […]

संस्कृत ने संस्कृत कर जन्मा भारत को वरदान दिया , पाला पोसा खूब सजाया माँ ने हिन्दी नाम दिया । सहज मधुर शब्दावली  मेरी लिखना -पढ़ना सभी सरल , रस  से भरी गगरिया मेरी छंद काव्य का जाम दिया  । बहने मेरी सब भाषायें मेरा झगड़ा कहीं नही , हाथ […]

भय का कारण तो जान गई भय से है मुक्त कहाँ नारी ? पानी के सहज थपेड़े सह बहने को विवश क्यूं है नारी । है चिन्ता मन में विकट बडी कैसे मैं पार करूँ नदिया ? चलना है दूर बहुत मीलों  हमने ना कभी हिम्मत हारी । बेबस ही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।