लोकतंत्र का अभिमान हूँ मैं भारत का संविधान हूँ। मुझमे बसा है भारत देखो हिंदुस्तान की जान हूँ। । मैने समता सम्प्रुभता से भारत को सींचा था। बाबा के सपनों में मैंने समाज वाद भी देखा था।। टूटे मेरे सपने स्वराज के राजघाट में लेटा हूँ। संसद के गलियारों में […]

मां मंदिर की आरती,मस्जिद की अजान है। मां वेदों की मूल ऋचाएं, बाइबिल और कुरान है। मां है मरियम मेरी जैसी, मां में दिखे खुदाई है। मां में नूर ईश्वर का रब ही मां में समाई है। मां आंगन की तुलसी जैसी सुन्दर इक पुरवाई है। मां त्याग की मूरत […]

सत्य आचरण धर्म तत्व है , प्रेम मानस का सार। लाख छुपाय छिप न सके, असत्य की होत हार ।। घट घट ईश्वर वास है, खोजत चहुँ दिश नैन। हरि मिले दीन कुटी में, भजते गुण दिन रैन।। राधा नाची बंशी धुन, गोपी श्याम नचाय। शबरी के जूठे बेर, प्रेम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।