ओलंपिक 2020 टोक्यो में 141 वर्षों के सूखे के बाद एक घनघोर वर्षा हुई भारत ने अपना पहला स्वर्ण जैवलिन थ्रो अर्थात भाला फेंक में जीता यह स्वर्ण पदक एथलीट में 1920 के बाद जीता गया पहला स्वर्ण पदक था 7 अगस्त 2021 की तारीख इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में […]

चित्तौड़ के राज घराने में उदयसिंह व जेवन्ता बाई के घर एक विलक्षण बालक का जन्म होता है। इसका नाम प्रताप रखा गया। जेवन्ता बाई जन्म से ही प्रताप को मातृभूमि के प्रति कर्तव्य का पाठ सिखाती है, अफगान शासक शेर शाह सूरी के अधीन चित्तौड़ पर उस समय उदयसिंह […]

भारतवर्ष सदैव से एक अलौकिक राष्ट्र रहा, जहां अपने महापुरुषों का स्मरण करने की परंपरा रही है। अनेक सन्तों, वैज्ञानिक, क्रांतिकारियों की जन्मभूमि होने के कारण भारत विश्व मे आध्यात्म का केंद्र ही नही रहा अपितु अपनी भूमिका को भारत ने विश्वगुरु बनकर सदैव निभाया भी है। आज से लगभग […]

सृष्टि में ऐसे कई दिव्य व्यक्तित्वों का आगमन हुआ जिन्होंने अपने कृतित्व से अपने कुल वंश का ही नही समस्त मानव जाति का मान बढ़ाया। मानव सभ्यता के ऐसे महापुरुष जिनके समान मर्यादा का प्रतिमान दूसरा कोई स्थापित नही हो पाया। त्रेता युग के दैवीय अवतार, जन जन के प्रिय […]

आज के बंगाल को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि 19 वी सदी के आरंभ का पाकिस्तान व बांग्लादेश के यही समीकरण होंगे। उस समय भी अंग्रेजी सत्ता ने मुस्लिमो के अव्यवहारिक घुसपैठ को महत्व न देकर, नजरअंदाज किया। इस समय बंगाल भी उसी दौर से गुजर रहा […]

पाकिस्तान जो कि इस्लामी विचारधारा के कारण हिन्दूस्तान से अलग होकर एक पृथक इस्लामिक देश बना मोहम्मद जिन्ना ने पाकिस्तान में मुसलमानों को सुरक्षित रहने का वादा किया था, जिन्ना स्वयं शिया मुस्लिम थे, फिर भी आज पाकिस्तान में शिया सुरक्षित नही। अंग्रेजों के छल और जिन्ना के विश्वासघात के […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।