कुछ अस्त-व्यस्त-सी है नज़र आती है ज़िन्दगी, कभी समेटने लगो तो और उलझ जाती है ज़िन्दगी। कभी खामोश रहकर सब सहकर घुटन हो जाए; बिंदास जिएं, न पल-पल मरें समझाती है ज़िन्दगी। मुसाफिर-सा मन कभी बंधना चाहे इसमें मर्ज़ी से; कभी ख्बाबों के पँख लगा हमें लुभाती है ज़िन्दगी।   […]

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हम दिल से उन्हें हर बार सलाम करते हैं; वो यूंही बेवफाई हमसे सरेआम करते हैंl    सीख लिया पत्तों ने पतझड़ में यूं संभलना; खाक होने का फिर वो इंतज़ाम करते हैं।   न होना मायूस यूं हारकर तुम कभी भी; हारकर कुछ लोग मुकद्दर को बदनाम करते हैं। […]

सुहाना अपने मम्मी-पापा की लाड़ली बेटी थीl एक छोटा भाई भी था सुहाना का। सुहाना अपने परिवार के साथ कम पैसों और कम सुविधाओं में भी खुश थी। सुहाना के पापा मामूली कलर्क थे,मुश्किल से ही गुज़ारा होता थाl मम्मी घर पर ही रहती थीं,पर समझदार महिला थी और अपने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।