आज पूरा भारत देश ६९ वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में देशभर में देशभक्ति का माहौल बन जाता है…नेताओं के भाषण और देशभक्ति फिल्मों व गीतों से टीवी,रेडियो,इंटरनेट सब गुलजार रहते हैं…सोशल मीडिया के वीरों की देशभक्ति चरम पर होती है…हर वर्ष आने वाले इस गणतंत्र […]

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मेरी चाहत में नहीं कोई और है, मेरी जिंदगी में वही सिरमौर है। काफ़िर हूँ चलता रहूंगा काम है, जिंदगी में अपना नहीं ठौर है। चिराग को सम्भालना मेरे कान्हा, बुझाने वाले यहां चारों ओर है। हर शब्द लिखा है सिर्फ उनके लिए, उनको मेरे शब्दों पर नहीं गौर है। […]

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(तर्ज-चिठ्ठी न कोई संदेश…) यूँ करके आंखें नम, हम सबको देकर गम, कहाँ तुम चले गए, खुशियों को करके कम,हम सबको देकर गम, कहाँ तुम चले गए….। कुछ तो ही कहा होगा,हमने न सुनी होगी इस गलती की सजा अब क्या यही होगी। तुम देकर दिल पे जख्म,ये है कैसा […]

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माँ असीमित है, माँ अविरल है, माँ अद्वितीय है, माँ निश्छल है, माँ खुदा है,माँ ईश्वर है, माँ दुआ है ,माँ परमेश्वर है। माँ धरा है,माँ आसमान हैं, माँ जहान है,माँ महान है माँ मन्नत है!माँ जन्नत है, माँ सुकून है, माँ शांति है, माँ शीतल है, माँ धैेर्य है, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।