शाम को रक्कासा के पग में जब पैंजनिया सजती हैं, और दौराने रक्स वो कैसी छम छम छम सी बजती हैं। तब मयकश है नोट लुटाते,वाह वाह वाह कहकर, और वासनामय नजरों में हुस्न को सारा ही भरकर। मैंने पूछा रोज क्यूं इनके विष दंतों को सहती हो, रोज़ शाम […]

नन्द को लाला वो बंशीवाला, मन का है काला,सखी बड़ो चितचोर है। बीच डगर में छेड़े कलईयां मेरी मरोड़े, दधि की मटकियां फोड़े,ऐसो नन्द किशोर है। अपने सखाओं संग करतो है उत्पात, काऊ से बो डरे नहीं बड़ो बरजोर है। दुर्लभ है जो सुख बड़े ग्यानी-ध्यानियों को, वाई सुख से […]

किन शब्दों में बयान करूँ मैं माँ को ? मेरे अस्तित्व का आधार,या मेरी श्वांसों में रची-बसी प्राणसुधा। मेरे व्यक्तित्व को रोशन करती लौ, या मेरे वजूद का बुनियादी ढाँचा। मेरी रुह में सम्मिलित रुहानियत,या मेरे संस्कारों की खुशबू….माँ को शब्दों में समेट पाना ,ईश्वर को परिभाषित करने जैसा है। […]

तलाशती हूँ अब भी, खामोशियों में गूंजती तेरी वो आवाज़ जो दे जाती थी राहत…..। बिना कुछ कहे आ जाता था सुकून… बिना सहलाए भी, लग जाता था मरहम। जिंदगी का हर ज़ख्म भर जाता था आ ही जाती थी चेहरे पर इक हँसी तेरे चेहरे की सौम्य मुस्कुराहट….. तलाशती […]

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जीवन में कभी, लगता है यूँ ही.. कुछ कर्म कटें कुछ बोझ हटे शायद तब ही लेती ज़िंदगी आज़माइशें……। कुछ उलझे पल, कुछ बोझिल दिल… कुछ थकता मन यादें पल छिन शख्सियत को मुक्कमल करतीं आज़माइशें……। कोई अंत नहीं दूजा पंथ नहीं. न चैन कहीं न विकल्प कोई करतीं मन […]

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धूप जैसे बरसती रही प्यार की, ज़िंदगी गुनगुनी-सी सिंकती रही.. तेरे वजूद की गर्मियाँ ही तो थीं, सर्द मौसम में दुशाले-सी लिपटी रहीं। धुंधली होती रही जो वक्त की गर्द से, उन लम्हों की महक अब भी बाकी तो है.. भीनी-भीनी सही,पर मिट न सकी, रुह के नूर में जैसे […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।