आशा एक सँजोकर कर्मरत रह कर उल्लास भर मन में स्फूर्त भर मन में ।। उपजाओ प्रेमभाव तज सब अहं ताव एकता से बढ़ आगे ईर्ष्या – द्वेष तज कर ।। करना न बहाना है समाज को चेताना है दायित्व निभाना है आलस का दाह कर ।। दीन – दुखी […]

जाति-पाति को छोड़कर,गुरु देते हैं ज्ञान, साथ ही करते हैं दूर,आरक्षण का अज्ञान। हौंसले बुलंद हों शिष्य के,ऐसी प्रेरणा देते हैं, अबोध शिष्य के दिल की बात,तुरंत जान लेते हैं। गुरु और शिष्य का,बहुत ही पावन नाता है, ज्ञान ग्रहण कर शिष्य,बड़े-बड़े पद है पाता। गुरु का पद है बहुत […]

  आया बसंत,आया बसंत, देखो,सबको भाया बसंत गेंदा,गुलाब,मोगरा,चमेली, सब फैलाएँ मिल अपनी सुगंध आया बसंत,आया बसंत। कलिकाओं ने घूंघट खोले, फूल चुपके-चुपके बोले देखो ज़रा दिग् दिगन्त, आया बसंत,आया बसंत। सुरभित कितना नव बसंत, कुसुमित कितना नव बसंत रहे यूँ ही यह जीवन पर्यन्त, आया बसंत,आया बसंत। दिग्भ्रमित कोई भी […]

बिगड़ने जो लगे अब रिश्ते,तुम सुनो…, कह रहे हो,तुम्हारी इनायत नहीं…। वायदे कर उन्हें तो,नहीं तोड़ना…, आज बदलें हमीं,कौन सूरत नहीं…। ख़ाब देखे हमीं ने,सुहाने कभी…, लो सुनो,अब किसी से अदावत नहीं…। पेश आए बड़े अदब से,जबकि हम…, कह रहे हो,हमें आज नफ़रत नहीं…। इस जहां से बसो,अब कहीं दूर […]

शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ न होना ही सिर्फ अपाहिजपन नहीं होता,संपूर्ण होने के बाद जब स्वाभिमान खत्म हो जाता है,असल में तब अपाहिज होता है इंसानl निशा भी अपाहिज हो चुकी थी,ऐसे लोगों के बीच थी जहां उसका स्वाभिमान दो कौड़ी का नहीं बचा थाl हज़ार बातें सुनने […]

गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम, जय जय गंगा मैया,जय जय राम,राम, राम। पतित पावनी गंगा देखो,कितनी है ये  पावन, उतर गए जो पानी में,लगे नीर मनभावन। न हो मन निकलने का तो,स्नान करे दिन -शाम, गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम। जय जय […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।