पावन गंगा

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ravi rashmi
गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम,
जय जय गंगा मैया,जय जय राम,राम, राम।
पतित पावनी गंगा देखो,कितनी है ये  पावन,
उतर गए जो पानी में,लगे नीर मनभावन। न हो मन निकलने का तो,स्नान करे दिन -शाम,
गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम।
जय जय गंगा मैया,जय जय राम,जय  राम॥
मैला हो जो मन किसी का,जाकर ले वह  नहा,
पाप हरो हे मैया मन के,हर एक ने है कहा।
मन का मैल रहे न मन पर,सब गंगा में है बहा,
गंगा के गुण गाए हर कोई,कोई लिखे क़लाम।
जय जय गंगा मैया,जय जय राम,जय  राम॥
है यह कितनी पावन गंगा,दूषित न कर पाये कोई,
शुचिता लिए है बहती गंगा,देखे उसे हर कोई।
पाँव छुआ ले जो पानी में,पावन होवे सोई,
समझो उसने घूम लिए तब,यहीं पे चारों धाम।
जय जय गंगा मैया,जय जय राम,जय  राम॥
राम-नाम है सत्य के बोल भी,देते हैं सुनाई यहाँ,
जलती-अधजली लाशें भी,देती हैं दिखाई यहाँ-वहाँ।
फिर भी मन में उगे न नफ़रत,ऐसा घाट दिखे कहाँ,
पावन पानी ले गंगा बहे,दिन-रात व सुबह-शाम।
जय जय गंगा मैया,जय जय राम,जय  राम॥
धीर नीर बहता है लेकर,सीने पर कई घाव,
अधम नहाएं या भक्तगण,नहीं आता उसको ताव।
विरासत में हमें मिली है गंगा,मन बन जाता है नाव,
निकली हिमालय से अविरल बह,करती न कहीं विश्राम।
गंगा मैया तुम्हें प्रणाम,ले ले जाएं हम तो नाम।
जय जय गंगा मैया,जय जय राम , जय  राम॥
                                                               #रवि रश्मि ‘अनुभूति’

परिचय : दिल्ली में जन्मी रवि रश्मि ‘अनुभूति’ ने एमए और बीएड की शिक्षा ली है तथा इंस्टीट्यूट आॅफ़ जर्नलिज्म(नई दिल्ली) सहित अंबाला छावनी से पत्रकारिता कोर्स भी किया है। आपको महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार,पं. दीनदयाल पुरस्कार,मेलवीन पुरस्कार,पत्र लेखिका पुरस्कार,श्रेष्ठ काव्य एवं निबंध लेखन हेतु उत्तर भारतीय सर्वोदय मंडल के अतिरिक्त भारत जैन महामंडल योगदान संघ द्वारा भी पुरस्कृत-सम्मानित किया गया है। संपादन-लेखन से आपका गहरा नाता है।१९७१-७२ में पत्रिका का संपादन किया तो,देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में गीत,ग़ज़ल,कविताएँ, नाटक,लेख,विचार और समीक्षा आदि निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। आपने दूरदर्शन के लिए (निर्देशित नाटक ‘जागे बालक सारे’ का प्रसारण)भी कार्य किया है। इसी केन्द्र पर काव्य पाठ भी कर चुकी हैं। साक्षात्कार सहित रेडियो श्रीलंका के कार्यक्रमों में कहानी ‘चाँदनी जो रूठ गई, ‘कविताओं की कीमत’ और ‘मुस्कुराहटें'(प्रथम पुरस्कार) तथा अन्य लेखों का प्रसारण भी आपके नाम है। समस्तीपुर से ‘साहित्य शिरोमणि’ और प्रतापगढ़ से ‘साहित्य श्री’ की उपाधि भी मिली है। अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट द्वारा ‘वुमन आॅफ़ दी इयर’ की भी उपाधि मिली है। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में प्राचीरों के पार तथा धुन प्रमुख है। आप गृहिणी के साथ ही अच्छी मंच संचालक और कई खेलों की बहुत अच्छी खिलाड़ी भी रही हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।