● डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ सत्ता और संघर्ष का चोली दामन का साथ है। इस समय जब देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल को बीते माह हुए पांच राज्यों के चुनावों में करारी शिकस्त मिली हो, तब आत्ममंथन अत्यावश्यक हो जाता है। कांग्रेस इस समय ऐसे बुरे दौर से गुज़र […]

रश्मिरथी राहुल व्यास:  ग्रामीण परिवेश से काव्य मंचों के गौरव तक  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ मौत अटल है…. आ तू, ऐसे क्यों खड़ी है, जिया हूं ज़िन्दगी तो मौत भी एक घड़ी है । शाश्वत है सब कुछ तो भी अंजाम जटिल है, इंतजार सबकुछ नहीं होता, मौत अटल है । अब तो […]

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रश्मिरथी अमन अक्षर: रत्नगर्भा मध्यप्रदेश का नव काव्य प्रकाश डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ देह बनवास को सौप कर वो चला चित घर की दिशा, शेष जाने किधर। १३ जून १९९० को निमाड़ की धरती पर खंडवा के पास ग्राम मुंदी में जन्मे और वर्तमान में इंदौर में रहने वाले अमन जिन्होंने बी टेक  […]

रश्मिरथी अरुण जैमिनी:  हास्य के रंग में साहित्य की किलकारी  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ सरकारी कार्यालय में नौकरी मांगने पहुँचा तो अधिकारी ने पूछा “क्या किया है” मैंने कहा- “एम.ए.” वो बोला- “किस में” मैंने गर्व से कहा- “हिन्दी में” उसने नाक सिकोंड़ी “अच्छा… हिन्दी में एम.ए. हो बड़े बेशर्म हो अभी तक […]

रश्मिरथी  शैलेष लोढ़ा : गर्म धरती से हास्य की ठंडक तक  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ अतीत ने वर्तमान की आंखों में झांका और मुस्कुरा के कहा, जीवन तो मैंने जिया, अब तो सिर्फ दौड़ है जीवन कहाँ रहा ?? नवम्बर ८, १९६९ को जोधपुर की धरती पर पिता श्याम सिंह लोढ़ा और माता […]

रश्मिरथी सुरेंद्र शर्मा : चार लाइना से जनता को हास्य में डुबाने वाले का नाम डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ ‘पत्नी जी! मेरो इरादो बिल्कुल ही नेक है तू सैकड़ा में एक है।’ वा बोली- ‘बेवकूफ मन्ना बणाओ बाकी निन्याणबैं कूण-सी हैं या बताओ।’ हरियाणा की नंगल चौधरी ग्राम में २९ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।