हर घड़ी कदम बढ़ाते रहो, मुश्किलों के बीच रास्ता बनाते रहो। ठहर कर पानी भी दुर्गन्ध देता है, ठहरो नहीं,ज़िन्दगी में मुस्कुराते रहो। लक्ष्य तक पहुँचना है हर हाल में, ये बात हमेशा दिमाग में लाते रहो। करना है रोशन अगला सवेरा, यह सोच,प्रयास मन में लाते रहो। लाख परिस्थितियाँ […]

जाने कितनी साज़िशें रची गई, दरम्यान हमारे.. किसी ने जरा-सा भी कुछ कह दिया अफसोस यकीन तुमने कर लिया। एक बार भी दिल की न सुनी, कि आवाज सुन लेते दिल बेचारा.. कब से यही कह रहा , कहीं ये साज़िश तो नहीं। अब समझने-समझाने की बात ही न रही, […]

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नया-नया बस्ता लेने की जिद, करता अब हर रोज चुन्नू.. जाना है मम्मी अब हमको स्कूल, मम्मी कहती-बाबू अभी रुक जाओ दिला दूँगी सब थोड़ा रुको..। पर चुन्नू ना-मम्मी, सबके पास है नया बस्ता, नई कॉपी,हमको भी चाहिए… मम्मी बोली-अच्छा,ला दूँगी। बस चुन्नू अब बस्ते के सपने देखे, आज गया […]

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पगडंडियों के सहारे, सफर तय न करना.. खुद से रास्ता बनाने का हौंसला रखना। चलना लीक पर सदैव, पर लीक से हटकर भी.. कुछ नया करना पगडण्डियों के सहारे यूँ कमजोर मत बनना। कायम रखना स्वयं का, अस्तित्व कि.. हर रहगुज़र पूछे तुम्हारी ऊँचाई का रास्ता। रोशन करते रहना अँधेरों […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।