हर घड़ी कदम बढ़ाते रहो, मुश्किलों के बीच रास्ता बनाते रहो। ठहर कर पानी भी दुर्गन्ध देता है, ठहरो नहीं,ज़िन्दगी में मुस्कुराते रहो। लक्ष्य तक पहुँचना है हर हाल में, ये बात हमेशा दिमाग में लाते रहो। करना है रोशन अगला सवेरा, यह सोच,प्रयास मन में लाते रहो। लाख परिस्थितियाँ […]

जाने कितनी साज़िशें रची गई, दरम्यान हमारे.. किसी ने जरा-सा भी कुछ कह दिया अफसोस यकीन तुमने कर लिया। एक बार भी दिल की न सुनी, कि आवाज सुन लेते दिल बेचारा.. कब से यही कह रहा , कहीं ये साज़िश तो नहीं। अब समझने-समझाने की बात ही न रही, […]

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नया-नया बस्ता लेने की जिद, करता अब हर रोज चुन्नू.. जाना है मम्मी अब हमको स्कूल, मम्मी कहती-बाबू अभी रुक जाओ दिला दूँगी सब थोड़ा रुको..। पर चुन्नू ना-मम्मी, सबके पास है नया बस्ता, नई कॉपी,हमको भी चाहिए… मम्मी बोली-अच्छा,ला दूँगी। बस चुन्नू अब बस्ते के सपने देखे, आज गया […]

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पगडंडियों के सहारे, सफर तय न करना.. खुद से रास्ता बनाने का हौंसला रखना। चलना लीक पर सदैव, पर लीक से हटकर भी.. कुछ नया करना पगडण्डियों के सहारे यूँ कमजोर मत बनना। कायम रखना स्वयं का, अस्तित्व कि.. हर रहगुज़र पूछे तुम्हारी ऊँचाई का रास्ता। रोशन करते रहना अँधेरों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।