मनहरण घनाक्षरी छंद…… पक्षियों को दाना-पानी,हम न खिलाएंगे तो , दाना-पानी कौन भला उनको खिलाएगा। यूं तो कई लीटर, पानी को बहाते हम, चुल्लू भर पानी इन्हें जीवन दिलाएगा। दो मुट्ठी गेहूं के दाने, इनको खिलाएंगे तो, क्या हमारे भंडारे में, बोलो फर्क आएगा। आपके भरोसे द्वारे-द्वारे वो भटकते हैं, […]

बहन ने प्यार से धागा ,           जो बाँधा ये इरादा है। मेरा भैया सुरक्षित हो ,          यही अरमान साधा है। हमेशा आप ही करना              मेरी रक्षा मेरे भैया। बड़ी जालिम है ये दुनिया ,   […]

सोलह श्रंगार करुं,ध्यान बृज का जो धरुं, राधा-कृष्ण रोज मेरी नजरों में आवै हैं॥ गोकुल की गली-गली,में है शोर उसका तो, भक्तों की जुबानों पर,सुबह आ जावै हैं॥ लोग राधा नाम गावै,पाछै श्याम कू मनावै, बाँसुरी की धुन पर भक्तों को नचावै है॥ राधा नाम संग गाओ,तुम भव तर जाओ, […]

सीमा पे जवान दिन-रात हो रहे शहीद, कुछ तो खयाल आप,इनका भी कीजिए। जो शहीद हो रहे हैं,देशहित में आज वहां, घर जा के सुध आप,उनकी भी लीजिए। अफसर मंत्रियों को,मिला है सम्मान जैसा, देश के शहीदों को भी,ऐसा मान दीजिए। बिना घर परिवार,रहते हैं सीमा पर, अपमान उनका न,घूंट-घूंट […]

ये सिक्का हमारा तो चलता रहेगा। वो मौसम वफा का तो आता रहेगा॥ तुझे ही खुदा से माँगा था सभी ने। पता है हमें भी तू आता रहेगा॥ तिरे प्यार की खुशबू आती है उड़कर। वफा के लिए फिर यूँ आना रहेगा॥ शक की नजर से ये दुनिया यूँ देखे। […]

तिरे लब पर हमेशा ही कोई रहता बहाना था, तुझे भी है मुहब्बत यह  मुझे यूँ आज़माना था। मुझे तुम मिल गए मानो सभी कुछ मिल गया मुझको, तुम्हारा प्यार ही मेरे लिए जैसे खज़ाना था। हमेशा की तरह बारिश में मिलने रोज़ आता था, मुहब्बत का यक़ीं हर रोज़ […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।