किसान एक सीधा सच्चा इन्सान है, मेहनत करता है मेहनत की खाता है फटे हाल रहता है। मिट्टी से खेलता है, मिट्टी में रहता है दिन-रात खून पसीना बहाता है, एक-दिन दो दिन नहीं हमेशा ही करता है। सादा जीवन उच्च विचार रखता है, हर प्रकार का अनाज पैदा करता […]
बरसो,बरसो रे मेघ, बरसो,बरसो रे मेघ। धूप से सूख रहे हमारे खेत, बरसो,बरसो रे मेघ। बरसो,बरसो रे मेघ॥ नदी,पोखर,तालाब और नाले, कब बहेंगे फिर होकर मतवाले। रिमझिम फुहारों को धरती पर भेज, बरसो,बरसो रे मेघ। बरसो,बरसो रे मेघ॥ मेंढक,झींगुर,मोर,पपीहा, बुलाए तुमको मेघ संवरिया। गर्मी से झुलस रही इनकी देह, बरसो,बरसो […]
