अब स्वर्ग सिधार चुके एक ऐसे जनप्रतिनिधि को जानता हूं,जो युवावस्था में किसी तरह जनता द्वारा चुन लिए गए तो मृत्युपर्यंत अपने पद पर कायम रहे। इसकी वजह उनकी लोकप्रियता व जनसमर्थन नहीं,बल्कि एक अभूतपूर्व तिकड़म थी। इसमें उनके परिवार के कुछ सदस्य शामिल होते थे। दरअसल उन साहब ने […]

रचनात्मकता,खत्म हुई शायद, नकलों का जहाँ,बोलबाला है। झूठे लोगों की,जय-जयकार, सच्चे का मुँह यहाँ काला है। पंगु जहाँ,चढ़ने लगे पहाड़, सज्जन के,मुहँ पर ताला है। जहाँ बैठे भोले,बने सियार समझो,कुछ गड़बड़ झाला है। जहाँ जीते, हारे बैठे हैं, हारों के गले,विजयमाला है। समझ की बहती,नदी नहीं, समझो,अज्ञान का नाला है। […]

शब्दों का नहीं होता कोई आकार या प्रकार, फिर भी शब्द चुभते हैं। शब्दों का नहीं होता है कोई वजन, फिर भी शब्द चोट करते हैं। शब्दों में नहीं होती है ज्वलनशीलता, फिर भी शब्द जलाते हैं। शब्दों में नहीं होते हैं दवा के गुण, फिर भी शब्द मन के […]

बॉलीवुड ने भारत को इतना सब कुछ दिया है…?? तभी तो आज देश यहाँ है..बलात्कार और गैंग रेप करने के तरीके,विवाह किए बिना लड़का-लड़की का सम्बन्ध बनाना और विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना तो है ही। चोरी-डकैती करने के नए-नए तरीके,भारतीय संस्कारों का उपहास उड़ाना,लड़कियों को छोटे […]

मित्रों नमस्कार, मेरा यह लेख धन्यवाद स्वरूप मेरे उन अनुयायियों (फालोअर्स)नहीं ,बल्कि उन विरोधियों को समर्पित है जिन्होंने अपने पारदर्शी लेकिन सच से परे होने वाले लेख पर मुझे यह लिखने के लिए प्रेरित किया है। हमेशा से ही सोशल मीडिया पर ऐसे चिकित्सा लेखों की भरमार रही है जिसमें […]

बहुत दूर है तुम्हारे घर से, हमारे घर का किनारा , पर हवा के हर झोंके से , पूछ लेते हैं मेरी जान, हाल तुम्हारा। लोग अक्सर कहते हैं, जिन्दा रहे तो फिर मिलेंगे, पर मेरी जान कहती है, निरंतर मिलते रहे, तो ही जिन्दा रहेंगे। दर्द कितना खुशनसीब है, जिसे पाकर अपनों को याद करते हैं, दौलत कितनी वदनसीब है ,जिसे पाकर लोग, अक्सर अपनों को भूल जाते हैं। इसलिए तो छोड़ दिया सबको, बिना वजह परेशान करना, जब कोई हमें अपना समझता ही नहीं, तो उसे अपनी याद दिलाकर भी क्या करना। जिंदगी गुजर गई, सबको खुश करने में, जो खुश हुए वो अपने नहीं थे, और जो अपने थे मेरी जान, वो भी खुश नहीं हुए। इसलिए संजय कहता है, कर्मो से डरिए , ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ़ कर देता है, परन्तु खुद के कर्म नहीं। #संजय जैन परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।