अच्छे दिन की शुरुआत हो चुकी थी लोगों को ठंढक का एहसास प्रचुर मात्रा में होने लगा था। लोगों के शरीर से गर्मी के पतले-पतले कपड़े उनी कपड़ों के आगे घुटने टेक रहे थे। जो लोग गर्मी के दिनों में कई बार स्नान किया करते उनके स्नान […]

अल्हड़ सा वो बचपन याद आता है मुझे मेरा वो चंचल मन याद आता है गुजारे थे दोस्तो संग,वो पल सुखद मैंने वो खिलौने वो अपनापन याद आता है भीगें बारिश में ,सने धूल मिट्टी में नहाएं थे जो नदियों में बदन याद आता है गुनगुनी धूप में करते थे […]

सम्हल कर उड़ तू परिंदे, तेरी उड़ान पर सय्याद बहुत से नजर गड़ाए है। तेरी उड़ान ने ना जाने कब से सय्यादो के होश उड़ाए है। तेरे पिंजरे में बांधने को पर, उन्होंने बहुत जाल बिछाए है। तेरी आजादी से उड़ने से वो सब हैरान बहुत है,तुझे बन्द करने  को  […]

राह हिंसा की तुम अपनाना नहीं जिंदगी बेकार,प्यार जिसने जाना नहीं राह अपना लो अहिंसा की यारों    शत्रु किसी को भी  बनाना  नहीं जहां चल  रहा  मोहब्बत  से  मानो   नफरतों को कभी तुम टिकाना नहीं गले से सभी को लगा लेना तुम    आँखे किसी को दिखाना नहीं […]

कल्पनाओं को छोडकर कर्म को अपनाना होगा विकृत हो रहे मनःस्थिति पर काबू पाना होगा। बहक रहे है सभी के कदम फैल रहा जीवन में अंधकार खाली समय में अंतःमन को झकझोरना होगा कल्पनाओं को छोडकर कर्म को अपनाना होगा। संगत की संस्कारो से खुद को बचाओ ऐ दोस्त बिगडती […]

मैं खुद जवाब हूँ हर सवाल का मुझको अफवाहों से डराता है क्या मुझको प्यास है सात समंदर की मुझको फिर बूँद-बूँद पिलाता है क्या मैंने आसमाँ को बाँहों में जकड़ रखा है तू मुझको ख़्वामखाह ज़मीं पे गिराता है क्या मैंने कितने होंठों को हुश्न के काबिल बना दिया […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।