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मौत के खौफ से भागती जिंदगी, खौफ के खौफ से भागती जिंदगी। करे क्यों यकीं कैसे धीरज धरे, नेह के नाम से काटती जिंदगी। कैसे कह दूँ कि वो सितमगर नहीं, एक-एक कोर को ताकती जिंदगी। अंधेरा इस तरह हर सूं छा गया, रोशनी के लिए झांकती जिंदगी। संग हवाएं […]

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रामायण में आदिकवि,करते हैं उल्लेख। रामराज्य के रूप को,खुले नयन मन देख।। ग्यारह हजार वर्ष तक,रहे अवध श्रीराम। बन्धु-बान्धवों संग ही,बना लोक सुख-धाम।। रावण रुपी छ्ल मरण,हरण दंभ सब पाप। सत्य सुयश का मार्ग ही,दिखलाते प्रभु आप।। सीता माता के हृदय,नाथों के हैं नाथ। मर्यादा पालक प्रभो,रहे सर्वदा साथ ।। […]

जय मातु केहरिवाहिनी सब पर कृपा कर दीजिए, हम आपके सब लाल हैं,भवतार पार उतारिए। संसार की सारी चमक चमके तुम्हारे भाल से, संहार दुष्टों का किया श्रंगार मुन्डों के माल से। प्रतिमा तुम्हारी दिख रही नयना नयन अभिराम है, चक्षु नेत्र शोभित आपका काजल जगत की शाम है। तुम […]

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हर दर्दे दिल की दवा नहीं होती, टूटता है कुछ यूं भी के सदा नहीं होती। खरीद पाता गुड़िया जो वो उस दुकान से, रात भर उसकी बेटी यूं रोई नहीं होती । उठाता क्यों बूढ़ा रोटी उस कूड़े से, आग जो भूख ने लगाई नहीं होती। लुटाती नहीं जो […]

मंद-मंद मुस्काती बेटी, जीवन का सार सबल बेटी.. गंगा-जमुना-सी निर्मल धार,. झरने-सी,कलकल बेटी। नव आशा का उज्ज्वल दर्पण, पलती-पढ़ती बन होनहार. प्रकृति का उन्मत्त श्रंगार, मुस्कानों का उद्गम स्थल.. जीवन का सार सबल बेटी, मंद-मंद मुस्काती बेटी। बेटे की आस रहा करती, बेटी फसलों-सी लहलहाती.. अपने कर्तव्यों की सीमा पर, […]

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लोगों ने कैसे-कैसे मुग़ालते पाल रखे हैं, दोस्त जानकर आस्तीनों में सांप पाल रखे हैं। वो तो समाया हैं ज़र्रे-ज़र्रे में, फ़िर क्यूँ पत्थरों में ही भगवान पाल रखे हैंl नसीब नहीं होता हर किसी पर मेहरबाँ, नादान लोगों ने गले में ताबीज़ पाल रखे हैंl ग़रीब को अब कोई […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।