लम्हों की किताब

0 0
Read Time2 Minute, 27 Second
 nilam dr
आधी रात सन्नाटों की नीरवता में,
व्याकुलता जब बढ़ने लगी
दिल में फिर खलबली-सी,
मचने लगी
दिल की किताब के चंद पन्ने,
पलट गए लम्हों की ओर
चंद किस्से बचपन के
हंस पड़े किलकारी मार।
माँ के आँचल बाप की ऊँगली,
दादी-नानी  की कहानी
चाचा की पीठ बुआ ढीठ,
सबसे निकल जब गलियों
के  गलियारे मित्रों के जमघट।
लुका-छिपी, गुल्ली डण्डा,
कंचों के रंगीले खेल
सतोलिया या मारा-मारी,
वो खेल-खेल में
रुठना मनाना बारी आने पर
दाम की,वो झूठे मौके तलाश
घर भागना,सच बहुत याद आए।
फिर इक पन्ने में जब,
सूखा गुलाब औ’ महक
से मेरा तन-मन सिहर गया,
पलकों की कोर भीग गई
हृदय की वीणा झंकृत हुई,
मन आँखों में वो परी चेहरा
नुक्कड़ के मकां की खिड़की
से पर्दे की ओट से छिपकर
तकता नज़र आया।
इक सफा मोती की बूंदन,
से सज्जित खुशबुओं में
लिपटा नज़र आया,
दुनिया की नज़र औ’ अपनों
की रुसवाई से जिसे छुपाया था।
वो लम्हा भी याद आया,
जब गली के मोड़ पर
डोली सजी  थी इक ओर
इक ओर हम लुटे से
दिल के टुकड़े हाथों में
लिए हालात से पिटे थे।
आज भी हम वहीं खड़े हैं,
वही मंजर है आखों में
बस वक्त का पहिया चलता
-चलता उम्र के पन्ने पलट रहा॥
                                                                           #डॉ. नीलम
परिचय: राजस्थान राज्य के उदयपुर में डॉ. नीलम रहती हैं। ७ दिसम्बर १९५८ आपकी जन्म तारीख तथा जन्म स्थान उदयपुर (राजस्थान)ही है। हिन्दी में आपने पी-एच.डी. करके अजमेर शिक्षा विभाग को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक रुप से भा.वि.परिषद में सक्रिय और अध्यक्ष पद का दायित्व भार निभा रही हैं। आपकी विधा-अतुकांत कविता, अकविता, आशुकाव्य आदि है।
आपके अनुसार जब मन के भाव अक्षरों के मोती बन जाते हैं,तब शब्द-शब्द बना धड़कनों की डोर में पिरोना ही लिखने का उद्देश्य है।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मुखौटा

Mon Aug 28 , 2017
मैंने एक शख्स देखा बड़ा ही भोला–भाला, वही आंख वही नाक वही नयन नक्श, मैंने वही देखा जो दिखाई दिया एक नेक इन्सान देखा।   अंदर झांककर देखा वो बड़ा ही भद्दा–सा शैतान था, जो हर किसी को धोखेबाज–फरेबी कहता था सिवाय अपने; मैंने अपने में वो शैतान देखा स्वार्थ देखा।   हैं हम महापापी चेहरे पे मुखौटा लगाकर रहते हैं, दूसरों को प्रवचन देते ढोंगीराम देखा ll                                                             […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।