पायल अब १८ की हो चली। जन्मदिन,शुभ दिन। इस पावन दिन पर हमेशा की तरह पिताजी की तरफ से कोई नायाब तोहफा दिया जाता रहा,लेकिन आज का तोहफा मेरे लिए यादगार बन गया।  दोपहर १२ बजे पिताजी ने कहा-`बेटा पायल,आज पूरा परिवार बड़े घर जाकर तुम्हारा जन्मदिन मनाएगा। जन्मदिन की […]

तस्वीर तेरी जब देखी,मैंने ये श्रंगार लिखा, अधरों ने तो कुछ न बोला,नैनों ने इकरार लिखा। बहती सर्द हवा के हाथों,मैंनें भी पैगाम दिए, तेरी यादों के सपनों को,जाने कितने नाम दिए। उर उपवन में खिलती कलियाँ,प्रेम-प्रेम महकाती है, सांसों की धीमी सरगम भी,नाम तुम्हारा गाती है। अंगड़ाई जब लेती […]

दो जिस्म एक जान कभी हो ना पाए, हमेशा रहते हैं भीड़ में,अकेले हो ना पाएl  कौन याद करता है बिछड़ने के बाद अब, हम तो चाहकर भी तुम्हें भुला ना पाएl  हर किसी का वक्त बदलता है एक दिन जरूर, बस वक्त पर ही अधिकार सब जमा ना पाएl  […]

(भारतीय सेना दिवस विशेष) मरने का शौक नहीं मुझे भी, जीवन से मुझको प्यार है। पर डरता नहीं जरा भी मैं, बस अपना भी एक परिवार है॥ गोलियां छूती हैं जब कानों को, बच्चों का चेहरा नजर आ जाता है। चुभती है जब गोली कहीं, मां के आंसू का डर […]

इस मंच के माध्यम से मैं हिन्दी संबंधी अपनी चिन्ताओं से सभी को अवगत कराना चाहता हूँ। हिन्दी की सबसे बड़ी समस्या उसके प्रति ममत्व अथवा अपनत्व की है।लखनऊ के अखबार में एक ९२ वर्षीया वृद्धा की खबर थी, जो जानकीपुरम(लखनऊ) के वृद्धाश्रम में मरणासन्न अवस्था में पड़ी हैं। उनके […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।