“हौंसला”

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nilesh jha
ख़्वाबों को दफनाकर क्योंकि,
कितने अंजाम अभी बाकी हैं।
पाकर रहेंगे सुदूर मंज़िल को,
 रूह में हौंसला ए जान, अभी बाकी है।।
चढ़ रही है पेड़ पर बेफिक्र गिलहरी,
ना जाने कितनी उड़ान अभी बाकी है।
तुम डरा कर तोड़ रहे थे मुझको,
कर दूंगा साबित, प्रमाण अभी बाकी है।।
चढ़ना है आसमां पर अबाध फिर से,
पाने को लक्ष्य अंजान अभी बाकी है।
कमज़ोरी नहीं पैनी नज़र को देख राही,
तीर साधे अर्जुन का कमान अभी बाकी है।।
गिराकर तू बड़ा ना होगा क्योंकि,
दिल में मेरे अरमान अभी बाकी है।
तू जला के ख़ाक कर इस जिस्म को,
दधीची हूँ मैं,हड्डी में प्राण अभी बाकी है।।
#नीलेश झा ‘नील’
परिचय:
नाम: नीलेश झा ‘नील’
पिता का नाम :श्री बृजेश झा
माता की नाम:श्रीमती शोभना झा
जन्मतिथि : 27 सितंबर 1986
शिक्षा : LLB , MBA, MSC.cs
शिक्षणस्थान:रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर , माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल मप्र
संप्रति: अधिवक्ता मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर , जिला एवं सत्र न्यायालय मंडला 
प्रकाशन:देश की प्रतिष्ठित विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में नियमित रचनायें एवं समीक्षाएं प्रकाशित!
विधा :- मुक्तक , बाल साहित्य, कविताये, लघुकथा , कहानियां , व्यंग्य , समीक्षाएं, समसामयिक विषयों पर लेख ।।
संपर्क सूत्र: देवदरा मंडला (मध्यप्रदेश)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।