कर्मों का हिसाब देना पड़ता है 

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sanjay
कोई भी यूँ हो चाहे कलयुग या सतयुग , इन युगो में भी जिन्होंने जन्म लिया उन्हें अपने कर्मो का हिसाब क़िताब यही पर देना पड़ता है / इसमें चाहे अमीर हो संत हो या गरीब हो , जैसे कर्म संसार में किये उन्ही के अनुसार उन्हें अपने अपने कर्मो का फल भोगना पड़ेगा / यही संसार का नियम है / इसी बात को समझने के लिए में एक छोटा सा दृष्टान देता हूँ ताकि में इस बात को समझा सकूँ ;-
एक छोटा सा शहर था उसमे एक सेठजी अपने परिवार सहित रहते थे, सेठ जी बहुत ही धर्म-कर्म में यक़ीन करने के साथ ही दयालु स्वाभाव के थे ।
सेठजी साहूकारी का व्यवसाय करते थे /उनके पास जो भी व्यक्ति उधार मांगने आता, वे उसे उधर देने के लिए मना नहीं करते थे । सेठ जी मुनीम को बुलाते और जो उधार मांगने वाला व्यक्ति होता उससे पूछते कि “भाई , तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में ?” जो लोग ईमानदार होते वो कहते , सेठ जी हम तो इसी जन्म में आपका कर्ज़ चुकता कर देंगे, वो भी पूरा ब्याज देकर क्योकि आपने हमारी मदद की है / तो हमारा भी फर्ज बनता है की जिसने मुसीबत में साथ दिया उसे भला क्यों झूठ बोलना।  कुछ लोग जो ज्यादा चालक व बेईमान होते वे कहते -सेठ जी, हम आपका कर्ज़ अगले जन्म में उतारेंगे । वो अपनी चालाकी पर वे मन ही मन खुश होते कि “क्या मूर्ख सेठ है I जो अगले जन्म में उधार वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे लोग मुनीम से पहले ही कह देते कि वो अपना कर्ज़ अगले जन्म में लौटाएंगे / मुनीम भी कभी किसी से कुछ पूछता नहीं था । जो जैसा कह देता मुनीम वैसा ही बही में लिख लेता था।
यह बात एक चोर को पता चला की इस शहर में एक सेठ जी है जो पैसे उधर देते है और वापिसी को अगले जन्म में लेते है / चोर के मन में लालच आई की क्यों न हम ऐसे सेठ से उधर ले और फिर पैसे वापिस देंगे ही नहीं / फिर क्या था एक दिन एक चोर भी सेठ जी के पास उधार मांगने पहुँचा ।उसे भी मालूम था कि सेठ अगले जन्म तक के लिए रकम उधार दे देता है । हालांकि उसका मकसद उधार लेने से अधिक सेठ की तिजोरी को देखना था । चोर ने सेठ से कुछ रुपये उधार मांगे, सेठ ने मुनीम को बुलाकर उधार देने को कहा । मुनीम ने चोर से पूछा – “भाई, इस जन्म में लौटाओगे या अगले जन्म में ?” चोर ने कहा – “मुनीम जी , मैं यह रकम अगले जन्म में लौटाऊँगा । मुनीम ने तिजोरी खोलकर पैसे उसे दे दिए । चोर ने भी तिजोरी देख ली और तय कर लिया कि इस मूर्ख सेठ की तिजोरी आज रात में उड़ा दूँगा ।फिर क्या मन में लालच का भूत जो सवार था / उसी  रात में ही सेठ के घर पहुँच गया और वहीं भैंसों के तबेले में छिपकर सेठ के सोने का इन्तजार करने लगा । अब घटना कुछ इस तरह से घाटी की अचानक चोर ने सुना कि भैंसे आपस में बातें कर रही हैं, और चोर को पशुओ की भाषा समझा आती थी ,भैंसों आपस में बात कर रही थी / एक भैंस ने दूसरी से पूछा – तुम तो आज ही आई हो न, बहन ? दूसरी भैंस ने जवाब दिया – हाँ, आज ही सेठ के तबेले में आई हूँ, सेठ जी का पिछले जन्म का कर्ज़ उतारना है और तुम कब से यहाँ हो ? दूसरी भैंस ने पलटकर पूछा, तो पहले वाली भैंस ने बताया – “मुझे तो तीन साल हो गए हैं, बहन / मैंने सेठ जी से कर्ज़ लिया था यह कहकर कि अगले जन्म में लौटाऊँगी । सेठ से उधार लेने के बाद जब मेरी मृत्यु हो गई ,तो मैं भैंस बन गई और सेठ के तबेले में चली आयी ।
अब दूध देकर उसका कर्ज़ उतार रही हूँ । जब तक कर्ज़ की रकम पूरी नहीं उतर जाती तब तक यहीं रहना होगा । इस तरह की दोनों भैसो की बातचीत चोर सुन रहा था / फिर क्या था चोर ने ये सब बातें सुनी, तो होश उड़ गए और वहाँ बंधी भैंसों की ओर देखने लगा। वो समझ गया कि उधार चुकाना ही पड़ता है / चाहे इस जन्म में या फिर अगले जन्म में उसे चुकाना ही होगा । चोर उल्टे पाँव सेठ के घर की ओर भागा और जो कर्ज़ उसने लिया था / उसे फटाफट मुनीम को लौटाकर रजिस्टर से अपना नाम कटवा लिया । हम सब इस दुनिया में इसलिए आते हैं / क्योंकि हमें किसी से लेना होता है तो किसी का देना होता है । इस तरह से हर मनुष्य या पशु पक्षी  को कुछ न कुछ लेने देने के हिसाब चुकाने होते हैं । इस कर्ज़ का हिसाब चुकता करने के लिए इस दुनिया में कोई बेटा बनकर आता है, तो कोई बेटी बनकर आती है, कोई पिता बनकर आता है I तो कोई माँ बनकर आती है/ कोई पति बनकर आता है, तो कोई पत्नी बनकर आती है /
कोई प्रेमी बनकर आता है , तो कोई प्रेमिका बनकर आती है /
कोई मित्र बनकर आता है, तो कोई शत्रु बनकर आता है /
कोई पढ़ोसी बनकर आता है तो , कोई रिश्तेदार बनकर आता है ।
चाहे दुःख हो या सुख हिसाब तो, सबको देना ही पड़ता हैं ।
यही प्रकृति का नियम है /
इसलिए साथियो हम बताना चाहते है की जब हमें ८४ योनि के बाद मानव जन्म मिला है तो क्यों न हम इसे सार्थक बनाये और अच्छे कर्म करके इस संसार से विदा ले / ताकि हमें और आपको किसी भी प्रकार का कर्ज न चुकाना पड़े / जरूरी नहीं है की हर दिन आप पूजा पाठ धर्म ध्यान आदि करे ? परन्तु एक काम तो आप सभी लोगो को करना चाहिए और वो है हमारे कर्म /
यदि आपको लेख पसंद आये तो हमें जरूर बताये और अपने मिलाने वालो को पढ़ने को भेजे /

           #संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।