जीवन में रस घोले हिन्दी

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मन की गाँठें खोले हिन्दी।
जीवन में रस घोले हिन्दी।।

मैं भी बोलूँ, तुम भी बोलो।
मन से जन-जन बोलें हिन्दी ।।

जीवन में रस घोले हिन्दी।

धरती बोले, अम्बर बोले।
सरिता बोले, सागर बोले।।
बूँद बोले, महासागर बोले।

पवन बोले, सुमन बोले।
झूम-झूम के ‘सावन’ बोले।

मन का ताला खोले हिन्दी।
जीवन में रस घोले हिन्दी।

माँ है हिन्दी, बहन है हिन्दी।
हमारी रहन-सहन है हिन्दी। ।

रस से भी है मीठी हिन्दी
फिर भी हमसे रूठी हिन्दी

हम गैरों को गले लगाते हैं
अपनों को समझ न पाते हैं

हिन्दी माँ सब कुछ सहती है
और बच्चों से कहती है-

सीख सको तो सीखो,
गाओ शत्-शत् भाषी गीत।
लेकिन भूलकर भी मत भूलना
हिन्दी और संस्कृत

जो अपनों को भूल जाता है
उसे संसार भूल जाता है

जो अपनों को ठुकराता है
वह शरण कहाँ पाता है ?

भारत माँ का सुहाग है हिन्दी
चूड़ी, कंगना और है बिन्दी

हिन्दी में पढ़ो, हिन्दी में लिखो
हिन्दी में गाओ गीत।
‘सावन’! समृद्ध भाषा-भाव निरेख
मुस्कुराये संस्कृत ।।

तनोपवन में मन-मयूर
झूम-झूमकर बोले हिन्दी ।
जीवन में रस घोले हिन्दी।।
जीवन में रस घोले हिन्दी।।

सुनील चौरसिया ‘सावन’

कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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#हेमेन्द्र क्षीरसागर पत्रकार, लेखक व विचारक Post Views: 473

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।