‘मिले मुद्दते यारा हो गया’

Read Time3Seconds
anamika mishra
दर्द के दरिया में बहते जमाना हो गया!
तुम मिले डूबते को तिनके का सहारा हो गया!

मिटा न पाओगे अब ये हँसी मेरे होठों की
खुशियों का मसीहा ही जब हमारा हो गया!

ईद पर वो आए हैं घर मेरे मेहमां बन कर
गले मिलने को आज हंसी बहाना हो गया !

डूब ही जाती मैं मदभरी आँखों की झील में
झुका दी पलकें चूने झील का किनारा हो गया!

महबूब तेरी गलियाँ ही हैं मेरे काबा काशी
लो अब संभालो ये दिल तुम्हारा हो गया!

करो जतन कोई तो सपने में ही चले आओ
जी लगता नही मिले मुद्दतें  यारा हो गया !

पेड़ों के झुरमुट से धीरे धीरे निकल रहा चाँद
कुमुदिनी खिली खूबसूरत हर नज़ारा हो गया!

परिचय

नाम-अनामिका मिश्रा
साहित्यिक उपनाम-दीपप्रिया 
राज्य-झारखंड 
शहर-राँची
शिक्षा-एम. ए/बी.एड
कार्यक्षेत्र-राँची/सी.बी.एस.सी 10+2 शिक्षिका
विधा -कविता, गीत, गजल, मुक्तक, कहानी, लघुकथा इत्यादि 
प्रकाशन-दो साझा काव्य संग्रह ,दैनिक भास्कर, वर्तमानअंकुर, बासुकी मेल, कादंबिनी में रचनाएं. प्रकाशित 
सम्मान-अभी तक नही
ब्लॉग-नही
अन्य उपलब्धियाँ-यदा कदा कवि सम्मेलन का हिस्सा होना
लेखन का उद्देश्य-मन के उद्गारों को निकलना  और समाज को एक नयी राह देने की कोशिश |
0 0

Arpan Jain

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ग्रीष्म का ये भीषण रूप

Mon May 7 , 2018
ग्रीष्म का ये रूप भीषण लोग हुए हैं सब व्याकुल सूरज की तो अपनी तपन जल बिन हैं कंठ -कंठ आकुल मचा है – चहुँ ओर हाहाकार जल बिन है सब बेकार। ताप रवि का सहने को फिर भी सक्षम हैं सारे किन्तु गिरते भू जल स्तर से फिर रहे […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।