गीत सुनाना

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pradeep daas

ओ री ! तू पाखी
बन जाए जो नीड़
तब गीत सुनाना ।

पंख पसार
चोंच में ले तिनका
होंगे नव निर्माण
प्राची की दिशा
करते कलरव
तब गीत सुनाना ।

बहती हवा
बन कर दुश्मन
उड़ा ले जाए नीड़
फिर भरना
हौंसले की उड़ान
नव नीड़ बनाना ।

श्रम सीकर
बूँदें तू चख लेना
स्वाद फिर बताना
सृजन सिक्त
प्रीत बने मधुर
तब गीत सुनाना ।  □

# प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

परिचय :-

जन्म     : 10 अगस्त 1979

शिक्षा    : एम.ए. द्वय [ हिन्दी साहित्य व राजनीति शास्त्र ] , बी.एड., CG SET उत्तीर्ण ।

प्रकाशित कृति : 
● मइनसे के पीरा – 2000 छत्तीसगढ़ी का प्रथम हाइकु संग्रह
● हाइकु चतुष्क – 2000 [ हिन्दी, उड़िया, छत्तीसगढ़ी व संबलपुरी हाइकु संग्रह ]
● संवेदनाओं के पदचिह्न – 2002 [ काव्य संग्रह]
● रूढ़ियों का आकाश – 2003 [ हिन्दी का प्रथम सेन्रियू संग्रह ]
● प्रकृति की गोद में – 2017 [ हाइकु संग्रह ]

अनुवादित कृति :
● वंदे मातरम् – 2017 [ उपन्यास ]

सम्पादित कृति : 
● प्राची – 2001 [ म.वि.वार्षिक पत्रिका ]
● जागृति – 2002 [ विद्यालयीन पत्रिका ]
● कबीर एक दृष्टि – 2003 [ समालोचना ]
● हाइकु वाटिका – 2004 [ साझा हाइकु संग्रह ]
● हाइकु सप्तक – 2006 [ हाइकु ग्रंथ ]
● हाइकु मञ्जूषा – 2006 [ हाइकु त्रैमासिक के कुल 07 अंक ]
● झाँकता चाँद – 2017 [ साझा हाइकु संग्रह ]
● ताँका की महक – 2017 [ ताँका संकलन ]
● कस्तूरी की तलाश – 2017 [ विश्व का प्रथम रेंगा संग्रह ]
● हाइकु मञ्जूषा – 2017 [ साप्ताहिक 01 – 50 अंक संचयन ]
● छत्तीसगढ़ की हाइकु साधना – 2018 [ साझा हाइकु संग्रह ]

रचनाओं का प्रकाशन :  कविताश्री, हाइकु-भारती, मरु गुलशन, साहित्य अमृत, कोशल प्रहरी, राष्ट्रभाषा, अभिनव इमरोज, हाइकु 2009, शत हाइकुकार साल शताब्दी, हाइकु की सुगंध, प्रवाह, माटी, हाइकु दर्पण, हाइकु मञ्जरी, अदबी माला, संगम संकल्पना, सीप में मोती, हिन्दी हाइकु प्रकृति-काव्य कोश, हाइकु- काव्य विश्वकोश, हिन्दी सागर आदि राष्ट्रीय स्तर की पत्र-पत्रिका, विशेषांक व विभिन्न साझा संग्रहों में प्रचुर कविताएँ, हाइकु, सेनरियू, ताँका, चोका, सेदोका, हाइबन, क्षणिकाएँ, लेख, शोध लेख, कहानी, संस्मरण  आदि रचनाओं का नियमित निरंतर प्रकाशन ।

सम्मान : कोविद, दीनबंधु, राष्ट्रभाषा रत्न, राष्ट्रभाषा आचार्य, शास्त्री, लोक कवि कबीर पुरस्कार, राष्ट्रीय युवा साहित्यकार सम्मान, मैन आॅफ द इयर – 2001, राष्ट्रभाषा प्रचारक, सरस्वती प्रतिभा सम्मान, रवीन्द्रनाथ टैगोर लेखक पुरस्कार, अंबेडकर फैलोशिप सम्मान, धन्नाजी नाना चौधरी पुरस्कार, उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, हाइकु मञ्जूषा रत्न सम्मान, हाइकु द्रोण सम्मान, श्रेष्ठ संपादक रत्न सम्मान, हिन्दी सेवी सम्मान, साहित्य के दमकते दीप साहित्यकार सम्मान, बाबु बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान, मात्सुओ बासो शब्द शिल्पी सम्मान, राष्ट्रभाषा आचार्य परीक्षा भारत में प्रथम स्थान हेतु स्वर्ण पदक प्राप्त, गुजरात विश्वविद्यालय से रजत स्मृतिचिह्न प्राप्त, विश्व के प्रथम रेंगा संग्रह के संपादन हेतु इण्डिया बुक आॅफ रिकार्ड़्स द्वारा वर्ष 2017 में “फर्स्ट इण्डो जापान पोयट्री वेन्चर” अवार्ड तथा भारत के कई साहित्यिक एवं सास्कृतिक संस्थानों द्वारा पुरस्कृत व सम्मानित ।

सम्प्रति  : हिन्दी व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. रजपुरी, वि.ख. – सीतापुर, जिला – सरगुजा ( छ.ग. ) PIN – 497111

स्थायी संपर्क : साहित्य प्रसार केन्द्र साँकरा, जिला – रायगढ़ ( छ.ग. ) PIN – 496554

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।