‘पेडमेन’ विरुद्व ‘पद्मावत’

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 भारतीय चित्रपट पर बड़ी फिल्मों का टकराव बड़ी आम बात रही है,यानी एक ही दिन दो बड़ी फिल्मों का प्रदर्शन सामान्य तौर पर लिया जाता रहा है।
इसी तारतम्य में इस साल दो बड़ी फिल्मों का टकराव आ गया है-‘पेडमेन’और ‘पद्मावत’।
हम पहले दोनों की प्रदर्शन की तारीख पर बात कर लेते हैं। ‘पेडमेन’ के ट्रेलर के साथ लगभग ४ महीने पहले से तारीख की घोषणा हो गई थी कि इसे २५ जनवरी ‘गणतंत्र दिवस’ पर  जारी किया जाएगा,लेकिन ‘पद्मावत’ देश की फिलहाल सबसे ज्यादा विवादित फिल्मों में से एक हो गई है। साथ ही देश के कई राज्यों ने उसके अपने प्रदेश में प्रदर्शन  को लेकर प्रतिबन्ध लगा रखा है कि,विधि और आदेश बिगड़ने का अंदेशा है। बड़ी तकलीफ-जद्दोजहद के बाद ‘पद्मावत’ को कुछ कट लगाकर केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने मंजूर किया है,जबकि राजपूतों और भंसाली विवाद फ़िल्म के निर्माण के वक्त से चल रहा है।
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हम दोनों फिल्मों के बजट का आंकलन करें तो ‘पेडमेन’ में ५० करोड़ और          ‘पद्मावत’ में १५० करोड़ ₹ है। इसमें
ब्रेक ईवन पॉइंट  क्रमशः ९० करोड़ ₹      और २०० करोड़ ₹ है। ‘पेडमेन’ में
अक्षय कुमार,राधिका आप्टे,सोनम कपूर है,जबकि ‘पद्मावत’ में दीपिका,रणवीर, तथा शाहिद कपूर सितारे हैं। निर्देशक संजय लीला भंसाली सहित बजट,
सितारों से अक्षय की ‘पेडमेन’ फ़िल्म से ‘पद्मावत’ भारी प्रतीत हो रही है|
वैसे,अक्षय की फ़िल्म १०० करोड़ क्लब की ग्यारंटी नहीं है,लेकिन कमा भी सकती है।
‘पद्मावती’ का विवादित होकर ‘पद्मावत’ में बदलना निश्चित तौर पर फायदा देगा और ‘पेडमेन’ से बड़ी ओपनिंग मिलती दिख रही है।
संजय भंसाली की फिल्मों में भव्यता, विहंगमता,तथा सेट के साथ कहानी, पटकथा सभी लाजवाब होने की ग्यारंटी होती है,पर ‘पेडमेन’ में जिस विषय को उठाया गया है वह विषय पारिवारिक होते हुए भी अप्रसांगिक है। हम भारतीय इतने खुले या आधुनिक नहीं हुए हैं कि, परिवार में सेनेटरी पैड्स की बात कर पाएंग,इसलिए इस विषय पर संजय फिर भारी पड़ गए हैं।
कुल मिलाकर संजय की फ़िल्म ‘पेडमेन’ पर भारी पड़ने वाली है,लेकिन इससे टिकट खिड़की पर फर्क नहीं पड़ेगा।
इससे पहले भी ‘ओम शांति ओम’-सांवरिया,लगान-गदर,मन-सत्या,दिल-घायल’ सहित ‘जब तक है जान-सन ऑफ़ सरदार,रईस-काबिल’ आदि बहुत- सी फिल्में हैं,जिन्हें कई जगह जनता ने समान प्यार और सम्मान दिया,यानी  दोनों फिल्मों को कामयाब बनाया है।
इस बार यही महसूस हो रहा है कि,  जनता का समान प्यार दोनों फिल्म को मिल सकता है,लेकिन तकनीकी रूप में ‘ ‘पद्मावत’ को मल्टीप्लेक्स में ज्यादा पर्दे और प्रदर्शन मिल सकते हैं। इसकी वजह फ़िल्म का केनवास और बजट बड़ा होने के साथ विहंगमता भी है।

           #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।