दहेज प्रथा-बाल विवाह अभिशाप 

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कच्ची उम्र में करें न शादी,
  केवल बोझ सदा बर्बादी।
कम उम्र में ब्याह रचाना,
    समझो सूली पर है चढ़ाना।
लेना-देना नहीं दहेज,
    इससे सदा करें परहेज।
ले दहेज और ऐश दिखाए,
    हो जुर्माना जेल भी जाए।
बहू को बेटी-सा अपनाएं,
    अपने घर को स्वर्ग बनाएं।
ले दहेज करे मनमानी,
    ऐसी शादी में मत जाना।
बहू को बेटी जैसा मानो,
    लक्ष्मी घर की है पहचानो।
छोड़ दिखावा हो संस्कार,
    बिन दहेज बढ़ता है प्यार।
मिलकर रोकें बाल विवाह,
    अगर करे कोई ऐसी चाह।
दहेज प्रथा को समझें पाप,
     बनें जागरुक मानव आप॥
                                  #बिनोद कुमार ‘हंसौड़ा’

परिचय : बिनोद कुमार ‘हंसौड़ा’ का जन्म १९६९ का है। आप दरभंगा (बिहार)में प्रधान शिक्षक हैं। शैक्षिक योग्यता दोहरा एमए(इतिहास एवं शिक्षा)सहित बीटी,बीएड और प्रभाकर (संगीत)है। आपके नाम-बंटवारा (नाटक),तिरंगा झुकने नहीं देंगे, व्यवहार चालीसा और मेरी सांसें तेरा जीवन आदि पुस्तकें हैं। आपको राष्ट्रभाषा गौरव(मानद उपाधि, इलाहाबाद)सहित महाकवि विद्यापति साहित्य शिखर सम्मान (मानद उपाधि) और बेहतरीन शिक्षक हेतु स्वर्ण पदक सम्मान भी मिला है। साथ ही अनेक मंचो से भी सम्मानित हो चुके हैं

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