इंसानियत महके…

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sampada
इंसानियत महके चमन
में,
ज़िंदादिली का त्राण हो
स्वार्थपरता की मुफ़लिसी
हो,
भीरुता निष्प्राण हो
ऐसी फ़िज़ा बने वतन की,
चहुँओर हर्ष ही हर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारत वर्ष हो॥
उन्माद की उल्टी फ़िज़ाएं,
स्थायित्व न ले सकें
रूढ़ि की काली घटाएं
पुनः न फिर घिर सकें,
परिंदों की मानिंद जन में
स्वीकृति सहर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारतवर्ष हो॥
अवसाद की तिरछी रेखाएं,
हैं नियति की तान
फिर भी निरन्तर बढ़ाएं,
अपने कुटुम्ब का मान
कर्तव्य पथ पर डटे रहें,
गर सामने ही उत्कर्ष हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का,
ऐसा भारत वर्ष हो॥
दमनकारी नीतियां पनपे
नहीं,
निर्मम कुरीतियां जन्मे
नहीं
गर कहीं भी द्वंद हो तो,
पहले विचार-विमर्श हो।
है प्रभु!! मेरे सपनों का
ऐसा भारतवर्ष हो॥
सम्पदा मिश्रा
परिचय : सम्पदा मिश्रा की जन्मतिथि-१५ नवम्बर १९८० और जन्म स्थान-महाराष्ट्र है। आप शहर- इलाहाबाद(राज्य-उत्तर प्रदेश) में रहती हैं। एम.ए. एवं बी.एड. तक शिक्षित सम्पदा जी का कार्यक्षेत्र-बतौर प्रवक्ता अर्थशास्त्र(डाईट-इलाहाबाद) है। आपकी विधा-गद्य एवं पद्य है। आप स्वर्ण पदक विजेता हैं और लेखन का शौक है। लेखन का उद्देश्य-समाज को नई दिशा देना है।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।