कुएँ में भांग 

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vaikunth
राधा रद्दी बीनती,सोच भाग्य लड़ जाय।
कहीं हाथ में बीनते,कंचन न पड़ जाय॥
पढ़कर करना क्या हमें,सोच रहा मजदूर।
सरस्वती नहीं भाग्य में,लक्ष्मी हैं मजबूर॥
सरस्वती माँ सोचकर,पीट रही हैं माथ।
क्या होगा अधिकार दें ? बुद्धि नहीं गर साथ॥
शिक्षा,पुस्तक,तुष्टि हित,भोजन भी भरपूर।
अभिभावक धन लोभ में,बना रहे मजदूर॥
यह तो भारत वर्ष है,पड़ी कुएँ में भाँग।
सब पैसा ही खोजते,बना रहे बस स्वांग॥
सत्ता-शासन क्या करे,घुट्टी कौन पिलाय ?
यहाँ सुरसती खेत में,घास निरावन जाँय ॥
कोई ग्राम सभा नहीं,जहाँ न हो स्कूल।
शिक्षक बालक खोजते,मति किसकी प्रतिकूल ?
बालक द्रव्य कमा रहा,नाम लिखा स्कूल।
‘मिड-डे’ खाने जायगा,कभी न सकता भूल॥
जान बूझकर बेचते,लेकर केतली चाय।
मोदी गर पीएम हुए,सीएम ही हो जाँय॥

                                       #वैकुन्ठ नाथ गुप्त ‘अरविन्द’

परिचय : वैकुन्ठ नाथ गुप्त ‘अरविन्द’ टेलियागढ़ (जिला-फैजाबाद(उप्र) में रहते हैं।आप काफी समय से काव्य रचना में लीन हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।