गरीबी

Read Time2Seconds
rajesh sharma
   आज रमेश बड़ा उदास नज़र आ रहा है। उसकी आँखों में बड़ी सोच है। वह बड़ा अधिकारी बनना चाहता है,मगर घर की गरीबी उसके हर सपने को तोड़ देती है।
  अचानक उसके पास एक लाल रंग की बोलेरो गाड़ी आकर रुकती है। उसमें से तीन व्यक्ति उतरते हैं। उनमें से एक व्यक्ति बोला-नौजवान उदास क्यों बैठा है। रमेश बोला-क्या करुं,रोजगार पाना चाहता हूं लेकिन घर की गरीबी देखी नहीं जाती। पिताजी नहीं है,माँ बीमार है। मेरी बहन दो दिन से बुखार में पड़ी है।
  रमेश बोला-तुम सब कौन हो ?
वह व्यक्ति बोला-हम एक संस्था से आए  हैं,जो युवाओं को रोजगार देती है। क्या तुम हमारे साथ चलोगे ?
  रमेश साथ जाने के लिए तैयार हो गया मगर घर की हालत उसे बार-बार रोकती। आखिर में उसने मना कर दिया। भाइयों आप पहले मेरे परिवार का इलाज करवा दीजिए।
  संस्था के लोगों ने रमेश की मदद की । आज घर मे सब स्वस्थ हैं। तब रमेश रोजगार से जुड़ गया।
#राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
परिचय: राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’ की जन्मतिथि-५ अगस्त १९७० तथा जन्म स्थान-ओसाव(जिला झालावाड़) है। आप राज्य राजस्थान के भवानीमंडी शहर में रहते हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है और पेशे से शिक्षक(सूलिया)हैं। विधा-गद्य व पद्य दोनों ही है। प्रकाशन में काव्य संकलन आपके नाम है तो,करीब ५० से अधिक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा आपको सम्मानित किया जा चुका है। अन्य उपलब्धियों में नशा मुक्ति,जीवदया, पशु कल्याण पखवाड़ों का आयोजन, शाकाहार का प्रचार करने के साथ ही सैकड़ों लोगों को नशामुक्त किया है। आपकी कलम का उद्देश्य-देशसेवा,समाज सुधार तथा सरकारी योजनाओं का प्रचार करना है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अंग्रेज़ी वह भाषा नहीं,जिसमें देश चिन्तन कर सके

Sat Dec 16 , 2017
भाषा- हम लोग सोचना प्रारंभ कर सकें इसके लिए माध्यम के रूप में एक भाषा का होना आवश्यक है। यह स्पष्ट है कि अंग्रेज़ी वह भाषा नहीं है जिसमें हमारा देश चिन्तन कर सके। पिछले चुनाव में यह बात सामने आई कि देश में चुनाव लड़ने की भाषा व्यापक रूप […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।