लफ्ज़ 

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satindar
लफ्ज़ दर लफ्ज़ लफ़्ज़ों को सिलता  हूँ,
अपने अंदर के डर को राम- राम करता हूँ।
अपने डर को सुइयाँ चुभोते  रहता हूँ,
ऐबों की उठ्ठक-बैठकें गिनता रहता  हूँ।
माँ की शॉल से ठंड को भगा  देता हूँ,
मय छूता नहीं दूध आब-सा  पीता हूँ।
कोसे-कोसे आटे की बू रुला  देती  है,
मूँगफली काजू मानकर सेंक  देता हूँ।
पीर के दिन से मैं चुप-सा हो जाता हूँ,
इतवार आते-आते ख़ामोशी बन जाता हूँ।
मज़ाल है! कोई होली पे रंग लगा दे मुझे,
कला की किताब में रंग ख़ुद  भरता हूँ।
बंदर से इंसा हुए तो तुझे  सालों हो  गए,
ख़ुदा कहता है-बता मैं कहाँ  मिलता  हूँ।
हिदायत देने वाले जुमले कहाँ  मिलते हैं,
मैं तो रास्तों पर लालटेन लिया फिरता हूँ।
दिल कब से कह रहा है तू भी बड़ा हो जा,
मैं अब भी किताबों में मोर पंख रखता हूँ॥
                                                      #सतिंदर सिंह
परिचय : सतिंदर सिंह का जन्म २९ जुलाई १९८५ का है। एम.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की है,और शिक्षक हैं। आप उत्तर प्रदेश के ललितपुर में रहते हैं। लिखना आपका शौक है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।